अनादर्श विलयन दो प्रकार के होते हैं -
(i) धनात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले विलयन-ऐसे विलयनों के लिए विलयन का कुल वाष्प दाब राउल्ट के नियम से अपेक्षित वाष्प दाब से अधिक होता है क्योंकि, विलयन में अणुओं के बीच अन्योन्य क्रिया, शुद्ध विलायक या विलेय के अन्योन्य क्रिया (आकर्षण बल) से कम होता है, अतः उसके वाष्प दाब का मान बढ़ जाता है। ऐसे विलयनों के बनने पर आयतन तथा एन्थैल्पी में वृद्धि होती है।
विशेषताएँ- (i) `P_A gt P_A^@ X_A " व " P_B gt P_B gt P_B^@ X_B (ii) Delta V_(mix) gt 0, (iii) Delta H_(mix) gt 0`
उदाहरण-साइक्लोहेक्सेन व एथेनॉल का विलयन-एथेनॉल के अणुओं के मध्य प्रबल हाइडोजन बंध होता है।
जब साइक्लोहेक्सेन के अणु, एथेनॉल अणुओं के बीच में आ जाते हैं, तो अंतराअणुक बल कम होता जाता है, जिससे विलयन के वाष्प दाब में वृद्धि तथा ऊर्जा का अवशोषण व आयतन में वृद्धि हो जाती है।
(ii) ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले विलयन-ऐसे विलयनों में विलयन का कुल वाष्प दाब राउल्ट के नियमों से अपेक्षित वाष्प दाब से कम होता है। क्योंकि विलयन में अणुओं के बीच अन्योन्य क्रिया शुद्ध विलायक या विलेय अणुओं के बीच अन्योन्य क्रिया से अधिक होता है। अतः विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है। ऐसे विलयनों के बनने पर आयतन तथा एन्थैल्पी में कमी होती है।
विशेषताएँ-(i) `P_A lt P_A^@ X_A "व" P_B lt P_B^@ X_B (ii) Delta V_(mix) lt 0 , (iii) Delta H_(mix) lt 0`
उदाहरण-ऐसीटोन व क्लोरोफॉर्म का विलयन-ये विलयन जब अलग-अलग रहते हैं, उनके बीच हाइड्रोजन बंध नहीं पाया जाता है, लेकिन जब उन्हें आपस में मिलाकर विलयन बनाते हैं, तो उनके अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध बन जाता है। जिससे विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है। ऐसे विलयनों के बनने पर ऊष्मा मुक्त होती है तथा आयतन कम हो जाता है।
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