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भारत में शिक्षा आयोग व शिक्षा समितियाँ|I...

भारत में शिक्षा आयोग व शिक्षा समितियाँ|Implementation Program 1986|Main Features|Operation Black Board|OMR|Summary

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Indian Universities Act 1904(Raleigh Commission)(भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम 1904 (रैले आयोग))|Gokhale's Bill(गोखले का बिल)|National Education Movement(राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन)|Sadler Commission(सैडलर कमीशन)|Hartog Committee(हार्टोग समिति)|OMR|Summary

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पाठ्यक्रम को कक्षाक्रम से बहुत कड़ाई के साथ बाँध देने के परिणामस्वरूप बच्चे के विकास का एक अनवरत प्रक्रिया नहीं बन पाता, अपितु कृत्रिम खंडों मे बँट जाता है। एक स्थिर पाठ्यक्रम बच्चे की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के विकास में सहयोग न देकर एक मजबूरी बन जाता है, जिसे बच्चा और उसका उध्यापक दोनों बेबस होकर स्वीकार करते हैं। यदि एक बच्चा किसी विषय में अपने सहपाठियों से अधिक दिलचस्पी रखता है, तो पाठ्यक्रम की बदौलत चसे पूरे एक वर्ष या इससे भी अधिक प्रतीक्षा करनी होती है, जब वह उस विषय में कुछ अधिक विस्तृत जानकारी अध्यापक और नई पुस्तक से प्राप्त कर सकेगा। श्री अरविंद आश्रम के शिक्षा केंद्र में, जहाँ पाठ्यक्रम पूर्वनिर्धारित और स्थिर नहीं रहता, बच्चों को अपनी व्यक्तिगत रुचि और मामर्थ्य के अनुसार किसी विषय की जानकारी की प्रगति जारी रखने की छूट रहती है। सामान्य स्कूलों में, जहाँ यह छुट नहीं दी जाती। होता प्रायः यह हैं कि नई कक्षा में आने पर उसे वही विषय बिलकुल नया और अपरिचित लगता है, जिसके बारे में काफी कुछ बह पिछली कक्षा में जान चूका था। विशेषतौर पर ऐसा तब होता है, जब पाठ्यक्रम पाठ्यपुस्तकों का पर्याय हो, जैसा भारत में है 'बच्चों को यह छूट दी जानी चाहिए कि वे अपनी रुचि व क्षमता के अनुसार किसी विषय की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकें।' यह स्थिति