Home
Class 10
SCIENCE
वायुमंडलीय अपवर्तन|तारे क्यों टिमटिमाते ...

वायुमंडलीय अपवर्तन|तारे क्यों टिमटिमाते है|ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते |अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्यास्त|इंद्रधनुष का निर्माण|रोचक तथ्य|Summary

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

तारें क्यों टिमटिमाते है |अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्यास्त |इन्द्रधनुष का निर्माण |ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते |Summary |वायुमंडलीय अपवर्तन

वायुमंडलीय अपवर्तन |गृह क्यों नहीं टिमटिमाते ?|अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्यास्त |प्रकाश का प्रकीर्णन, टिंडल प्रभाव |स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है?, सूर्य का रंग

Recap|कांच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का विक्षेपण |इंद्रधनुष |अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्योदय |Summary

जड़त्व के चैतन्य के साथ लगातार रहवासी बनकर पुल स्वयं चैतन्यमय हो उठता है प्राकृतिक जड़ भी अपनी अंतवर्ती चेतना में प्राणवान है मनुष्य द्वारा निर्मित पुरातत्व भी प्रकृति के इन्ही है प्राणो से मिलकर उसके साहचर्य के परिणाम स्वरूप कालांतर में प्रकृति में ही तब्दील हो जाता है। प्रकृति , जो ऊपर से जड़ दिखती है वह अपनी गतिशील उपस्थिति में सक्रीय और जीवट है। पहाड़ , नदी , निर्झर , पेड़ , गलम , वीरुघि सभी जड़ प्राकृति के चैतन्य अंश से लबालब है इनकी गतिमीयता , इनकी परिवर्तनशीलता कभी - कभी अलक्षित रहकर भी अपनी जीवंतता को प्रमाणित करती रहती है इसी जीवंतता के साथ मनुष्यकृत किले , पुल , मंदिर अपनी दीर्घयात्रा में प्रकृति गतिशील अंग बन जाते है। नदी की गतिशील भंगिमाओं , नदी की बदलती छवियों , नदी की जिवंत हरकतों के बीच बरसो से खड़ा पुल अपनी लखोरी ईंटो में अनंत सुर्यास्तो की लालिमा से रंजीत मात्र एक दृश्य नहीं रह जाता है। उसके व्यक्तित्व की रक्तिम आभा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक न जाने कितने शेड्स में बदलकर उसे प्रकृति का हिस्सा बना देती है उसे अनंत रंग - स्पन्दों में बदल देती है नदी के बरजोर प्रवाह से निरंतर होड़ लेती आदि धार में कड़ी अपना प्रतिबिम्ब झांकती पुल की मेहराबे , तिकोने अनियारे दृढ़व्रती स्तम्भ और पुल के अंतराल में अनुगूँज भर्ती लहरों की लीला -ध्वनियाँ पुल को महज चुना , ईंट , रेत, पत्थर , लोहा और अन्य पार्थिव वस्तुओ का संपुंजित सायुज्य नहीं रहने देती है। कालांतर में पुल प्रकृति में तब्दील होकर चैतन्य में अपनी संवेदना -प्रणाली का भाव -विस्तार बनकर विराट जीवन की स्पंदित फांक बन जाता है। ऐसे में पुल केवल यात्राओं का साधन नहीं रहता है , वह अनेक सांस्कृतिक यात्राओं की बिम्बधमी फ्लापी नदी के विस्तृत मॉनिटर -पॉट के लहरीले स्क्रीन पर अनेक दृशय इबारते लिखता रहता है। लेखक के अनुसार पुरातत्व का निर्माण किसने किया है ?

पिछली कक्षा में हमने सीखा|ऑक्सीकरण अभिक्रिया|क्यों जलते हुए पदार्थ ज्वाला उत्पन्न करते हैं अथवा नहीं करते हैं?|कोयले तथा पेट्रोलियम का निर्माण|कार्बनिक यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म|प्रतिस्थापन अभिक्रिया

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। 'विद्यालय' का संधि-विच्छेद है

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। कौन सा शब्द पुस्तक का पर्याय है?

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। 'सूक्ष्म' का विलोम