संभार तन्त्र (लॉजिस्टिक) वृद्धि (Logistic Population Growth)-प्रकृति में किसी भी समष्टि में संसाधन सीमित ही होते हैं।
अतः समष्टि में चरघातांकी वृद्धि नहीं होती क्योंकि सीमित संसाधनों के कारण व्यष्टियों में प्रतिस्पर्धा होती रहती है। प्रतिस्पर्धा के कारण योग्यतम जीवित रहते हैं और जनन करते हैं, जबकि अयोग्य नष्ट होते रहते हैं। किसी भी प्राकृतिक आवास में अधिकतम सम्भव संख्या के पालन-पोषण के लिए पर्याप्त संसाधन होते हैं और इससे आगे और वृद्धि सम्भव नहीं होती, उस आवास में उस जाति के लिए इस सीमा को प्रकृति की पोषण क्षमता .K. मान लेते हैं।
किसी आवास में सीमित संसाधनों के साथ वृद्धि कर रही समष्टि आरम्भ में पश्चता अवस्था (लोग फेस) को दर्शाती है। इसके पश्चात् त्वरण और मंदन और अन्ततः अनन्तस्पर्शी प्रावस्थाएँ आती हैं, जब समष्टि घनत्व पोषण क्षमता तक पहुँच जाता है। समय (1) के सन्दर्भ में N का आरेख सिग्मॉइड वक्र (Sigmoid curve) बन जाता है। इस प्रकार की समष्टि वृद्धि संभार तन्त्र (लॉजिस्टिक) वृद्धि कहलाती है। इसे निम्नलिखित समीकरण से स्पष्ट करते हैं-
`(dN)/(dt) = (rN(K-N))/(K)`
N= समय t पर समष्टि घनत्व,
r= प्राकृतिक वृद्धि की दर (इन्ट्रिन्जिक) दर
K = पोषण क्षमता को प्रदर्शित करता है।
d = मृत्यु दर
b= जन्म दर।
अधिकांश प्राणियों की समष्टि में वृद्धि के लिए संसाधन परिमित हैं और ये शीघ्र सीमित हो जाते हैं, इसलिए लॉजिस्टिक वृद्धि मॉडल को अधिक यथार्थपूर्ण माना जाता है।