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Class 12
PHYSICS
प्रकाश - विद्युत प्रभाव के संबंध में लेन...

प्रकाश - विद्युत प्रभाव के संबंध में लेनोर्ड व्दारा किये गये प्रयोग का सचित्र वर्णन कीजिए ।

लिखित उत्तर

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प्रकाश - विद्युत प्रभाव में उत्सर्जित होने वाले ऋणात्मक आयनों की प्रकृति , प्रकाश - विद्युत धारा तथा प्रकाश की तीव्रता में संबंध तथा उत्सर्जित फोटो आयनों की ऊर्जा एंव वेग की , प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य पर निर्भरता को ज्ञात करने के लिए लोनार्ड ने एक प्रयोग किया था । इस उपकरण में एक ग्लास ट्यूब में निर्वात पैदा कर दिया जाता है । कैथोड C पर क्वार्ट्ज प्लेट Q से होते हुए पराबैंगनी प्रकाश को डाला जाता हैं । कैथोड C को ऋण या धन विभव दिया जा सकता है । ट्यूब के अंदर एक धातु की प्लेट जिसमें एक छोटा छेद उसके केंद्र पर होता है तथा यह पृथ्वी से जुड़ी होती है एक ऐनोड की भाँति कार्य करती है । `E_(1)` और `E_(2)` धातु के दो छोटे - छोटे इलेक्ट्रोड होत हैं जो इलेक्ट्रोमीटर `E_(1) "व" E_(2)` से जुड़े होते हैं ।
ऋणात्मक आयनों की प्रकृति - ऋणात्मक आयनों की प्रकृति ज्ञात करने के लिए लेनार्ड ने कैथोड C को उच्च ऋणात्मक विभव दिया तथा उस पर प्रकाश डाला जिससे कैथोड से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होकर ऐनोड की ओर प्रतिकर्षित होते हैं तथा कैथोड एंव ऐनोड के बीच त्वरित होते हैं । ऐनोड A के छेद से होकर इलेक्ट्रॉन एकसमान वेग से गति करते हुए प्लेट `P_(1)` पर पहुँच जात हैं जहाँ `E_(1)` इलेक्ट्रोमीटर व्दारा उन्हें दर्शाया गया हैं । एक इलेक्ट्रोमैगनेट के व्दारा A व `P_(1)` के बीच एक समान चुम्बकीय क्षेत्र इस प्रकार उत्पन्न किया जाता हैं कि इलेक्ट्रॉन पुंज प्लेट `P_(1)` पर न पहुँचकर एक वृत्ताकार मार्ग को तय करते हुए प्लेट `P_(2)` पर पहुँच जाये जिसे इलेक्ट्रोमीटर `E_(2)` व्दारा दर्शाया जाता हैं । ऐनोड A पर पहुँचने वाले सभी ऋण आयनों का वेग - लगभग एकसमान होता हैं , क्योंकि A व C के बीच विभवान्तर काफी अधिक होने के कारण आयनों के प्रारम्भिक वेगों को , उनके व्दारा C से A तक त्वरित होने के कारण प्राप्त वेगों की तुलना में नगण्य माना जा सकता है । अतः ऐनोड A पर पहुँचने वाले आयन की गतिज ऊर्जा
`eV = (1)/(2) mv^(2)` ...(1)
यहाँ पर e तथा m आयन का आवेश व द्रव्यमान हैं ।
जब आयन ऐनोड A से एकसमान वेग के साथ चुम्बकीय क्षेत्र B में वृत्ताकार पथ तय करते हुए `P_(2)` पर पहुँचता हैं तब
`Bev = (mv^(2))/(r)` ...(2)
यहाँ पर r का मान `P_(1) "व" P_(2)` की ऐनोड A की छेद से दूरियाँ मापकर , ज्ञात किया जा सकता है ।
समी. (1) व (2) से , `eV = (1)/(2) m ((Be)/(m))^(2) = (1)/(2) m (B^(2) e^(2) r^(2))/(m^(2))`
= `(1)/(2) (B^(2) e^(2) r^(2))/(m)`
या `(e)/(m) = (2V)/(B^(2)r^(2))`
V, B तथा r के मान सूत्र में रखकर e/m के मान की गणना की गयी तथा लेनार्ड ने e/m का मान लगभग `1*2 xx 10^(7) emu` निकाला जो अन्य विधियों व्दारा निकाले गए मान के तुल्य है , जिससे यह ज्ञात होता है कि प्रकाश - विद्युत प्रभाव में उत्सर्जित ऋणात्मक आयन इलेक्ट्रॉन ही है ।
प्रकाश - विद्युत धारा की आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भरता - लेनार्ड ने अपने प्रयोग से यह निष्कर्ष भी निकाला कि प्रकाश - विद्युत धारा आपतित प्रकाश की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है ।
फोटो इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा व वेग - लेनार्ड ने अपने प्रयोग से यह निष्कर्ष भी निकाला कि उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉनों का वेग एंव गतिज ऊर्जा शून्य से एक निश्चित अधिकतम मान तक परिवर्तित होती है तथा यह निश्चित अधिकतम मान आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर नही करता है , बल्कि उसकी तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करता है ।
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