Home
Class 14
MATHS
भूमि के एक आयताकार टुकड़े की लम्बाई और चौ...

भूमि के एक आयताकार टुकड़े की लम्बाई और चौड़ाई `5:3` के अनुपात में हैं उसके स्वामी ने उसे चारो तरफ से घेरने के लिए रू0 7.50 प्रति मीटर की दर से रू0 6000 खर्च किए। उसकी लम्बाई और चौड़ाई का अन्तर बताइए?

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

The cost of levelling a circular field at 50 Paise per square metre is Rs 7700. The cost (in Rs) of putting up a fence all round it at Rs 1.20 per meter is (Use pi= 22//7 ) एक वृत्ताकार मैदान को समतल करने की लागत 50 पैसे वर्म मीटर की दर से 7700 रू आती है। उसके चारों ओर बाड़ लगाने की लागत 1.20 रू प्रति मीटर की दर से क्या आएगी । (प्रयोग करे: pi= 22//7 )

A telegraph post is bent at a point above the ground due to storm. Its top just touches the ground at a distance of 10 sqrt3 m from its foot and makes an angle of 30^@ with the horizontal. Then length (in metres) of the telegraph post is एक टेलीग्राफ का खंभा आँधी के कारण भूमि के ऊपर एक बिन्दू पर झुक गया है। उसका शीर्ष उसके पाद से 10 sqrt3 की दूरी पर ,भूमि को स्पर्श कर रहा है और क्षैतिज रूप से 30^@ का एक कोण बना रहा है। टेलीग्राफ के खंभे की लम्बाई (मीटर में) कितनी है?

There is a path of equal width of 3.5 m along with a building measuring 25 m in length and 15 m in breadth. Find the flooring cost of this path at the rate of Rs. 25.50 per sq. m. एक 25 मीटर लम्बा तथा 15 मीटर चौड़ा माप के भवन के साथ 3.5 मीटर एक समान चौड़ाई का मार्ग है | Rs. 25.50 प्रति वर्ग मीटर की दर से मार्ग की फ्लोरिंग लागत है:

Incomes of A and B are in the ratio 5:3 and their expenditure are in the ratio 9:5. If income of A is twice the expenditure of B, then what is the ratio of savings of A and B? A और B की आय 5 : 3 के अनुपात में है और उनके व्यय 9 : 5 के अनुपात में हैं | यदि A की आय B के व्यय से दोगुनी है, तो A और B की बचत का अनुपात ज्ञात करें |

Length and breadth of rectangular field are in the ratio 5 : 2. If the perimeter of the field is 238 m. Find the length of the field. एक आयताकार मैदान की लंबाई और चौड़ाई 5 : 2 के अनुपात में है। यदि मैदान का परिमाप 238 मीटर है, तो मैदान की लंबाई ज्ञात कीजिए।

निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं के प्रति किए गए अन्याय, शोषण के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता तो-

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं के प्रति किए गए अन्याय, शोषण के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता तो

विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी में सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। चे उसके प्रति सहानुभूति प्रकट करने और उसे समझने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान् जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े महात्मा जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है । लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरूष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थिर कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का समय उपयुक्त होता है। अध्ययन के लिए किस नियम का दृढ़ता से पालन होना चाहिए?