'एक वृक्ष की हत्या' कविता की केंद्रीय संवेदना को लिखिए ।
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`एक वृक्ष की हत्या' इस कविता में कवि कुँवर नारायण ने वृक्षों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति अपना स्नेह जताते हुए कहा है कि वृक्ष की हत्या करना अपने मित्र की हत्या करने के समान है। वृक्षों का महत्त्व बताते हुए कवि ने कहा है कि वृक्ष हमारे रक्षक हैं। कवि ने अपने घर के बाहर खड़े वृक्ष को चौकीदार के रूप में पहरा देते हुए देखा है। वृक्ष को अपना भरोसेमंद मित्र समझते है। वृक्ष के होते कवि को अपने घर की सुरक्षा के चिंता नहीं रहती थी, लेकिन उस वृक्ष के कट जाने पर कवि गहरी चिंता में डूब जाता है। कवि वृक्ष को प्रकृति का रूप मानते है और वृक्ष के प्रति प्रेमभाव है। वृक्ष सम्पूर्ण वनस्पति जगत का प्रतिनिधि है। घर के बाहर बरसों खड़े रहे वृक्ष के साथ कवि का एक अपनेपन का रिश्ता जुड़ गया था । एक दिन उसे कटा हुआ देखकर कवि को न सिर्फ अपने लिए दुःख हुआ, किन्तु पुरे संसार की चिंता भी होने लगी । सम्पूर्ण शहर, देश, नदियाँ, वायुमंडल, फसलें, जंगल आदि वृक्ष की बदौलत कार्यशील रहते है, लेकिन वृक्षों की कटाई से वायुमंडल अशुद्ध हो, फल-फूलों में कमी हो सकती है, वर्षा के कारक बनकर जल देने वाले वृक्षों की कटाई से धरती पर अकाल पड़ सकता है, पानी की कमी महसूस हो सकती है। वृक्ष तो देश को हरा-भरा रखते है और मनुष्य को पानी के जरिए जीवन देते हैं । वृक्ष के बिना हमारा जीवन खतरे में हो सकता है। प्रदूषणरूपी नादिरशाह हमारे जीवन की अमूल्य सम्पत्ति और स्वास्थ्य रूपी धन की लूट-पाट कर रहा है। वृक्ष के बिना हरी-भरी धरती एक मरुस्थल बन सकती है। इस प्रकार, वृक्ष ही हमारे जीवन, देश, धरती और सम्पूर्ण संसार की चेतना है। इस केंद्रीय संवेदना को कवि ने हमारे सामने रखा है।
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