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Class 14
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निचे दिए गए रेखाचित्र पर विचार करे और नि...

निचे दिए गए रेखाचित्र पर विचार करे और निमिन्लिखित पर्सन का उतर दे!

2006 -2012 के बीच डीजल का औसत मूल्य कितना है?

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The cost of 6 pencils is Rs. 30 and 12 pens is Rs. 120. Find the average cost of 50 pencils and 50 pens. 6 पेंसिल का मूल्य रु 30 और 12 कलमों का मूल्य रु120 है | 50 पेंसिल और 50 कलमों का औसत मूल्य कितना है ?

The price of a rubber is Rs. 3. The price of 20 rubbers is equal to that of three pens. The price of a pen is equal to that of two pencils and the price of six pencils is equal to that of five markers. What is the price of one marker ? एक रबड़ का मूल्य 3 रूपए है | 20 रबडो का मूल्य तीन कलमों के मूल्य के बराबर है | एक कलम का मूल्य दो पेंसिल के मूल्य के बराबर है और छह पेंसिल का मूल्य पांच मार्कर के मूल्य के बराबर है | एक मार्कर का मूल्य कितना है ?

The bar graph given below shows the profit (in multiples of thousand rupees) of a company during the year 2010-2018. The average profit for the year 2015-2017 is what percentage more than the 2012 profit? नीचे दिए गए दंड आरेख में वर्ष 2010-2018 के दौरान किसी कंपनी के लाभ (हजार रुपए के गुणक में) को दर्शाया गया है | वर्ष 2015-2017 का औसत लाभ 2012 के लाभ से कितना प्रतिशत अधिक है ?

शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, मृगतृष्णा का है। बाजार की मृगतृष्णा शिक्षार्थी को - लोभ-लालच देकर अपनी तरफ दौड़ाते रहने को विवश करने को उतारू खड़ी है। बाजार के इनललचाने वाले रास्तों पर आकर्षण है, चकाचौंध है और सम्मोहित कर देने वाले सपने हैं। दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है जो शांति दे सकता है, संतोष दे सकता है और हमारे आत्मतत्त्व को प्रबल करता हुआ विमल विवेक दे सकता है। निश्चित ही वह मार्ग श्रेयस्कर है, मगर अपनी ओर आकर्षित करने वाले बाजार का मार्ग प्रेयस्कर है। इस दोराहे पर खड़ा शिक्षार्थी बाजार को चुन लेता है। लाखों-करोड़ों लोग आज इसी रास्ते के लालच में आ गए हैं और शिक्षा के भंवरजाल में फंस गए हैं। बाजार की खूबी यही है कि वह-फंसने का अहसास किसी को नहीं होने देता और मनुष्य लगातार फंसता चला जाता है। किसी को यह महसूस नहीं होता कि वह दलदल में हैं बल्कि महसूस यह होता है कि बाजार द्वारा दिए गए पैकेज के कारण वह सुखी है। अब यह अलग बात है कि सच्चा सुख क्या है? और सुख का भ्रम क्या है? जरूरत विचार करने की है। सवाल यह है कि बाजार विचार करने का भी अवकाश देता है या कि नहीं। गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि: