यदि एक गुटका (मान लें A) निचे की ओर आए तो दूसरे गुटके को ऊपर की ओर जाना होगा | ऐसा इसलिए कि डोरी की कुल लंबाई तो उतनी ही रहेगी, इसलिए यदि एक ओर की लंबाई घटेगी तो दूसरी ओर की बढ़ेगी | अर्थात, किसी भी समय अंतराल में A जितनी दुरी निचे आएगी, B उतनी ही दुरी ऊपर चढ़ेगी | अर्थात, किसी भी समय दोनों गुटकों के वेग परिमाण में बराबर होंगे, पर दिशाएँ विपरीत होंगी | इसका अर्थ यह भी हुआ कि किसी भी समय दोनों गुटकों के त्वरण भी परिमाण में बराबर होंगे, पर दिशाएँ विपरीत होंगी | यदि गुटके A का त्वरण `vec(a_(1))` और दूसरे गुटके B का त्वरण `vec(a_(2))` हो, तो
`vec(a_(1))=vec(-a_(2))`.
इस संबंध को हम कलन का उपयोग करके भी प्राप्त क्र सकते हैं | डोरी बायीं और जहाँ घिरनी को छोड़ रही है उस बिंदु को `O_(1)` कहें तथा दाहिनी ओर जहाँ घिरनी को छोड़ रही है उसे `O_(2)` कहें | किसी समय t पर गुटके A की `O_(1)` से दूरी `l_(1)` तथा गुटके B की `O_(2)` से दूरी `l_(2)` मानें | चूँकि बिंदु `O_(1)` स्थिर बिंदु है, अत: `v_(1)=(dl_(1))/(dt)` गुटके A का वेग होगा | इसी तरह, `v_(2)=(dl_(2))/(dt)` गुटके B का वेग होगा | चूँकि लंबाई `l_(1)` समय के साथ बढ़ रही है, `(dl_(1))/(dt)` धनात्मक होगा | परंतु, लंबाई `l_(2)` समय के साथ घट रही है, इसलिए `(dl_(2))/(dt)` ऋणात्मक होगा | अत :, `v_(1)` तथा `v_(2)` की दिशाएँ एक-दूसरे के विपरीत होंगी | इसी तरह, `(dv_(1))/(dt)` गुटके A का त्वरण होगा तथा `(dv_(2))/(dt)` गुटके B का त्वरण होगा |
अब रस्सी की लंबाई,
`L=l_(1)+l_(2)+pir`, जहाँ r घिरनी की त्रिज्या है |
अवकलित करने पर,
`(dL)/(dt)=(dl_(1))/(dt)+(dl_(2))/(dt)+(d)/(dt)(pir)`
या `" "0=(dl_(1))/(dt)+(dl_(2))/(dt)`.
या `" "0=v_(1)+v_(2)." "...(i)`
आप समझ ही गए होंगे कि रस्सी की लंबाई समय के साथ नहीं बदलती, अत : `(dL)/(dt)=0` होगी | इसी तरह घिरनी की त्रिज्या भी निश्चित है अत :, `(dr)/(dt)=0`
अब समीकरण (i) को अवकलित करने पर,
`0=(dv_(1))/(dt)+(dv_(2))/(dt)" या "(dv_(1))/(dt)=-(dv_(2))/(dt).`
अर्थात, दोनों गुटकों के त्वरण के मान आपस में बराबर हैं, पर उनकी दिशाएँ विपरीत हैं |