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BIOLOGY
लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप बनी संतति की ...

लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप बनी संतति की जीवित रहने के अच्छे अवसर होते हैं। क्यों? क्या यह कथन हर समय सही होता है?

लिखित उत्तर

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लैंगिक प्रजनन में नर और मादा दो प्राणियों की आवश्यकता होती है नर शुक्राणुओं का निर्माण करते हैं जबकि मादा अण्डों का निर्माण कराती है। शुक्राणुओं और अण्डों को सामूहिक रूप से युग्मक कागते हैं। नर युग्मक (शुक्राणु) तथा मादा युग्मक (अंडा) के संलयन या संयुग्मन से युग्मनज बनता है। युग्मकों के संलयन से नए जीव का विकास शुरू होता है। युग्मकों के संयुग्मन को गर्भाधान कहते हैं। इस विधि से उत्पन्न संतति या उसके माता-पिता समान रूप से तदरूप नहीं होते हैं।
वे संततियाँ अपने माता-पिता से अलग होती हैं। यह विभिन्नता क्रोमोसोम्स के विसंयोजन और युग्मकों के संलयन के समय बने जीनों के नए संयोजन के कारण आती है। इस प्रकार लैंगिक जनन में निराकरण (विलोपन) की प्रतिकूल विशेषताओं के अवसर बहुत अधिक है। इसलिए यह संतति के लिए सबसे अच्छी विधि समझी जाती है।
ऊपर दी गयी व्याख्या हमेशा सच नहीं होती। यदि माता किसी बड़े रोग से पीड़ित हैं या उसे ठीक प्रकार से आहार नहीं मिल पा रहा है तो संतति की उत्तरजीविता संभव नहीं है।
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