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BIOLOGY
फसलों के सुधार की आधुनिक तकनीक का नाम बत...

फसलों के सुधार की आधुनिक तकनीक का नाम बताइए | यह फसल सुधार में किस प्रकार लाभदायक है ? समझाइए |

लिखित उत्तर

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फसलों में सुधार की आधुनिक तकनीक ऊतक संवर्धन (Tissue culture) है | जब पारस्परिक प्रजनन विधियों से फसलों की उन्नत किस्में तैयार की गई तब भी बढ़ती हुई खाधान्नों की माँगो को पूरा नहीं किया जा सकें | अतः पर्याप्त उन्नत फसलों को तैयार करने व बढ़ती खाद्यान्न माँगों की आपूर्ति हेतु आधुनिक तकनीक ऊतक संवर्धन का सहारा लिया गया | 20 विं सदी के मध्य में जिव वैज्ञानिकों ने अनुसंधान करके यह ज्ञात किया कि पौधे के भाग से सम्पूर्ण पौधों को पुनर्जनित किया जाना सम्भव है, हुए कर्तोतक कहते है | किसी कोशिका कर्तोतक से पूर्ण पादप में जनित्र होने कि क्षमता को पूर्णशक्तता कहते है | कर्तोतक का एक विशिष्ट पोश माध्यम में तथा रोगाणुरहित स्थिति में पात्रे संवर्धन किया जाता है | इस पोश माध्यम में कार्बन स्रोत जैसे- सुक्रोज तथा अकार्बनिक लवण, विटामिन, अमीनो अम्ल तथा वृद्धि नियंत्रक, जैसे-ऑक्सिन, साइटोकाइनिन आदि उपस्थित होने चाहिए | ऊतक संवर्धन विधि द्वारा पौधे के कायिक या वानस्पतिक प्रवर्धन को सूक्ष्म प्रवर्धन कहते है | इस विधि में बहुत छोटे कर्तोतक का उपयोग करके बहुत छोट-छोटे पौधे कम समय में उत्पादित करते है | इनमें प्रत्येक पादप आनुवंशिक रूप से मूल पादप के समान होते है, जहाँ से वे पैदा हुए है, इन्हे सोमाक्लोन (Somaclone) कहते है |
उत्तक संवर्धन तकनीक से रोग मुक्त पादपों का संवर्धन उत्पादन सम्भव है | प्रत्येक पादप विषाणु (Virus) से संक्रमित होते है, परन्तु उन पौधों के विभज्योतक (शीर्ष तथा कक्षीय) विषाणु से प्रभावित नहीं होते है | अतः विषाणुमुक्त पादप तैयार करने के लिए पूर्णतया मुक्त होते है | वैज्ञानिकों ने केला, गन्ना, आलू आदि में विभज्योतक संवर्धन द्वारा व्यापारिक स्तर पर रोगमुक्त पादप तैयार किये है |
ऊतक संवर्धन के अंर्तगत वैज्ञानिकों ने पादपों से एकल कोशिकाएँ पृथक कर उनकी भित्ति को सेल्यूलोज तथा पैक्टिनेज एन्जाइम कि सहायता से प्लाज्मा झिल्ली द्वारा घिरा नग्न जीवद्रव्य पृथक कर लिया | प्रत्येक किस्म में वांछनीय लक्षण विधमान होते है | पादपों की दो आनुवंशिक रूप से भिन्न किस्मों से अलग किया गया जीवद्रव्य युग्मित होकर संकर जीवद्रव्य उत्पन्न करता है जिससे नए पादप तैयार किये जाते है | यह संकर कायिक संकर, जबकि यह प्रक्रम कायिक संकरण कहलाता है | इस विधि के द्वारा पोटेटो (आलू तथा टमाटर के जीवद्रव्य संकरण से प्राप्त कायिक संकर) तथा ब्रोमेटो (बैंगन तथा टमाटर के जीवद्रव्य संकरण से प्राप्त कायिक संकर) विकसित किए गए है | इन दोनों कायिक संकरों के पादपों में व्यावसायिक उपयोग हेतु वांछित समुच्चित अभिलक्षणो का अभाव था | ऊतक संवर्धन विधि का प्रयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने पादपों में विभिन्नता प्राप्त की, उसे सोमाक्लोनल विभिन्नता कहते है | ये विभिन्नताएँ स्थायी होती है तथा कृषि के लिए उपयोगी होती है |
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