कोई ऐसा उदाहरण दीजिए जो मनुष्यों की क्रियाओं द्वारा पारिस्थितिक तंत्र में परिवर्तन को दर्शाता है।
लिखित उत्तर
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किसी भी पारिस्थितिक तंत्र पर मनुष्य कई तरह से प्रभाव डालता है। कार्बन के चक्रीकरण को ही देखें तो जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण में कार्बन के ऑक्साइडों की मात्रा बढ़ने लगी है। साथ ही हवा में कार्बन के कण की मात्रा भी अधिक हो रही है। नुकसान पहुँचाने वाले कीटों और सूक्ष्म जीवों से बचाने के लिए धान की तरह अन्य फसलों में भी विभिन्न कीटनाशी, कवकनाशी, शाकनाशी आदि दवाओं का उपयोग किया जाता है। इनमें से कुछ रसायनों का जल्दी अपघटन हो जाता है किन्तु कुछ लम्बे समय तक मिट्टी में पड़े रह जाते हैं, जो हानि पहुँचाने वाले जीवों को समाप्त करने के साथ-साथ मित्र जीवों और फसलों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। कभी-कभी ये फसलों द्वारा अवशोषित होकर उन फसलों को खाने वाले मनुष्यों और पशुओं के शरीर में पहुँच जाते हैं और अनेक रोग भी उत्पन्न करते हैं।
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हमारा पर्यावरण - पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह