(अ)नामांकित चित्र

(ब)प्रयोग विधि -1 सर्वप्रथम ड्राइंग बोर्ड पर सफ़ेद काजल समतल पर रखकर उत्तर-दक्षिण दिशा ज्ञात करके दोनों बिन्दुओ को मिलाती रक रेखा खींचती है।दंड चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को भोगोलिकी उत्तरी ध्रुव (उत्तर दिशा )की ओर रखकर चुम्बक की सीमा रेखा खींचती है ।2.इसके पश्चात चुम्बक के ऊपरी ध्रुव के पास एक बिंदु लेकर दिक् सूचि को इस परकार रखते है दिक् सूचि की सुई का दिक्षीणी ध्रुव बनाय गाय बिंदु की ओर हो तथा सुई के दूसरे सिरे पर पैंसिल से एक बिंदु बनाते है ।3.दिक् सूचि को उठाकर इस प्रकार रखते है की इसका दक्षिणी ध्रुव लगाय गए बिंदु की ओर इसके पश्चात पुन:इस क्रिया में सुई के ऊपरी ध्रुव के पास पेंसिल से एक बिंदु लगाते है।इस क्रिया को दोहराते हुए चुम्बक के दक्षिणी ध्रुव तक लगाते जाते है आउट उत्तर से दक्षिण तक बिंदु मिलते जाते है ।इन सभी बिन्दुओ को मिलने पर एक वक्र रेखा बनती है जिसे चुम्बकीय बल रेखा कहते है।इसी प्रकार उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से अनेक बल रेखाय खींचती है ।4.और तीर का निशान बना लेते है ।बल रेखाओ के मध्य में (अक्ष के लंबवत)एक वक्रीय चतुर्भुज प्राप्त होता है जिसके अंदर उदासीन बिंदु मिलता है।5 .चुम्बक के मध्य से उदासीन बिंदु तक दुरी नापते है ।(स)सावधानियाँ-(i) प्रयोग के दौरान ड्राइंग बोर्ड एवं चुम्बक नहीं हिलना चाहिए,(ii)चुम्बकीय सुई सवतंत्र होनी चाहिए,(iii)चुम्बक अत्यधिक प्रबल नहीं होना चाहिए।