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BIOLOGY
मनुष्य में नर जनन तन्त्र का वर्णन कीजिए।...

मनुष्य में नर जनन तन्त्र का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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1. वृषण (Testis)- दो अण्डाकार वृषण शरीर के बाहर वृषण कोषों में होते हैं। इन वृषणों में शुक्राशु बनते हैं और वृषण कोष उनमें तापक्रम बनाए रखते हैं। शुक्राणु एपिडाइडिमिस नामक नली में संचित रहते हैं।
2. शुक्रवाहिनी Spermatic duct) यह पली बृषय के एपिडाइडिमिस से आरंभ होकर मूत्र मार्ग में मिलती है। यह भित्ति पेशीय क्रियाओं द्वारा शुक्रागुओं को मूत्र मार्ग तक ले जाने का कार्य करती है।
3.मूंत्र मार्ग (Urethra) शुक्राणु ले जाने वाली शुक्रवाहिनी शुक्राशय से रस प्राप्त करती है जिससे शुक्रापुओं का पीषण होता है, अब यह नली मूत्र मार्ग में खुलती हैं।

4. शिश्न (Penis) - यह नर का बाह्य जनन अंग है, जो विशेष प्रकार के स्पंजी ऊतकों का बना होता है। मूत्र मार्ग एक पेशीय अंग शिश्न में खुलता है । शिश्न में बहुत अधिक मात्रा में रुधिर प्रवाहित होता है और उसकी पेशियाँ भी विशेष प्रकार की होती हैं, जो शिश्न को कभी-कभी सख्त बना देती हैं। शिश्न शुक्राणुओं सहित वीर्य को मादा जननांगों में पहुँचाने का कार्य करता है।
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