बायो गैस संयंत्र में ईंटों से बनी गुंबद टंकी होती है जिसमें गोबर व जल का गाढ़ा घोल (slurry) बनाया जाता है। इसे संपाचित्र (digester) में डाल देते हैं, जिसमें ऑक्सीजन नही होती। अवायवीय सूक्ष्मजीव, जिन्हें जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती, गोबर का अपघटन करते हैं। जैव गैस को संपाचित्र के ऊपर बनी टंकी में सचित किया जाता है। इसे पाइपों द्वारा बाहर निकाला जाता है। जैव गैस में 75 प्रतिशत मीथेन गैस होती है, जो धुँआ उत्पन्न किए बिना जलती है और इसके जलने के पश्चात् राख जैसा कोई अपशिष्ट भी नहीं बचता है। जैव गैस का उपयोग प्रकाश के स्त्रोत के रूप में भी किया जाता है।
