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CHEMISTRY
व्याख्या कीजिए- (i) मंडल परिष्करण (Zon...

व्याख्या कीजिए-
(i) मंडल परिष्करण (Zone refining), (ii) स्तम्भ वर्णलेखिकी (Column chromatography) |

लिखित उत्तर

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(i) मंडल परिष्करण या प्रभाजी क्रिस्टलीकर (Zone refining or Fractional crystal-lisation)- विशिष्ट उपयोगो हेतु शुद्धतम धातु प्राप्त करने हेतु इस विधि का उपयोग किया जाता है उदाहरण के लिए अर्धचालक (Semiconductors) के रूप में उपयोग के लिए सिलिकॉन व जर्मेनियम को इसी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है यह विधि इस तथ्य पर आधारित है की अशुद्ध धातु के ठोस अवस्था की तुलना में द्रव में अधिक विलेय होती है तथा अशुद्धियाँ होने पर उसका गलनांक शुद्ध धातु से कम होता है
इस छड़ में धीरे - धीरे विस्थापित किया जाता है हीटर के आसपास धातु पिघलती है जैसे-जैसे हीटर आगे बढ़ता है धातु क्रिस्टलीकृत होता जाता है तथा अशुद्धियाँ पिघले क्षेत्र में चली जाती है यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक पूरी अशुद्धियाँ छड़ के एक सिरे पर नहीं आ जाती जिसे बाद में अलग कर दिया जाता है यह विधि प्रभाजी क्रिस्टलीकरण (Fractional crystallisation) भी कहलाती है

(ii) स्तम्भ वर्णप्रक्रम या अधिशोषण स्तम्भ वर्णप्रक्रम (Column chromatography or Adsorption column chromatography) - यह विधि कांच नली में बंद (Packed) अधिशोषक के स्तम्भ पर मिश्रण के पृथक्करण से सम्बंधित है स्तम्भ के निचले सिरे पर स्टॉप कॉक (Stop cock) लगा होता है अधिशोषक पर अधिशोषित होने वाले मिश्रण को अधिशोषक स्तम्भ के ऊपर रखा जाता है अब एक अन्य द्रव मिश्रण जो वाहक (Eluant) का कार्य करता है स्तम्भ में नीचे की ओर बहने दिया जाता है यह वाहक मिश्रण अपने साथ धीरे - धीरे पूर्व अधिशोषित पदार्थो को बहाकर ले जाता है मिश्रण के विभिन्न अवयव स्तम्भ के विभन्न भागो में अधिशोषित हो जाते है ।
वह अवयव जो अधिक प्रबलता से अधिशोषित होता है स्तम्भ के ऊपरी भाग में रहता है ओर पट्टी बनता है अधिशोषित यौगिकों को विभिन्न घोलको में घुलाकर एक - एक करके पृथक कर लिया जाता है इस प्रक्रिया को निक्षालन (Elution) कहते है निक्षालन की क्रिया के लिए प्रायः जल, एल्कोहॉल, एसीटोन पेट्रोलियम, ईथर आदि घोलको का उपयोग होता है अधिशोषण के रूप में प्रायः एलुमिना मैग्नीशियम ऑक्साइड, सिलिका जेल कैल्सियम कार्बोनेट आदि का व्यवहार होता है इस विधि में साधारणः एक भाग योगिक के लिए चालीस भाग अधिशोषक प्रयुक्त होता है । कभी - कभी नली से अधिशोषित स्तम्भ को बाहर निकालकर प्रत्येक रंगीन बैण्ड को काट लिया जाता है इन रंगीन बैण्डो से अधिशोषित यौगिकों को घोलक द्वारा निष्कर्षित (Extract) कर रवाकरण की क्रिया द्वारा शुद्ध अवयव प्राप्त किये जाते है
इस विधि द्वारा किसी मिश्रण से रंगहीन (Colourless) अवयवों का पृथक्करण तभी संभव है जब वे पराबैंगनी प्रकाश (Ultra-violet light) में विभिन्न प्रतिदीप्त (Fluorescence) प्रदर्शित करते हो यदि वे प्रतिदीप्ति प्रदर्शित करते तो अधिशोषक को ही प्रतिदीप्ति पदार्थ (Fluorescent material) में डुबोया जाता है मिश्रण के विभिन्न अवयवों को अधिशोषित करने वाले क्षेत्र पराबैंगनी प्रकाश में गहरे रंग (Dark colour) के दिखाई पड़ने लगते है जिससे अवयवों के पृथक्करण में सुविधा होती है प्रयोग शीशे की नली की जगह क्वार्टज़ (Quartz) की नली में किया जाता है
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