जीवन की उत्पत्ति के आधुनिक सिद्धान्त का प्रतिपादन रशियन वैज्ञानिक ओपेरिन ने किया। इस मत के अनुसार जीवन की उत्पत्ति आदि पृथ्वी के समुद्री जल में उपस्थित रासायनिक पदार्थो के विशिष्ट ढंग से संगठित होने के कारण निम्नलिखित चरणों में हुई-
(i) पृथ्वी तथा उसके वातावरण का निर्माण- सबसे पहले पृथ्वी वायु के एक गोले के रूप में बनी जो ठण्डी होकर ठोस रूप में बदल गयी। इसके भारी तत्व केन्द्र में तथा हल्के तत्व बाहर की तरफ व्यवस्थित हुए। सबसे बाहर चार तत्व H, C, O तथा N थे। इनमे `O_(2)` मुक्त रूप में नहीं थी। इन चार तत्वों से `H_(2), H_(2)O, CH_(4), NH_(3), CO_(2)` एवं HCN आदि पदार्थ बने।
(ii) लघु कार्बनिक अणुओं का निर्माण- ऊपर वर्णित यौगिक व्यवस्थित होकर सरल कार्बनिक पदार्थो में परिवर्तित हो गये-
(iii) बहुलको का निर्माण- उपर्युक्त प्रकार से बने सभी पदार्थ जल में घुले थे। इन सभी ने बहुलीकरण द्वारा जटिल रसायनो का निर्माण किया-
(a) शर्करा + शर्कराएँ `rarr` पॉलिसैकेराइड
(b) वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल `rarr` वसाएँ
(c) नाइट्रोजनी क्षार + शर्करा + फॉस्फेट `rarr` ऐडीनोसीन फॉस्फेट
(d) अमीनो अम्ल + अमीनो अम्ल `rarr` प्रोटीन
(e) नाइट्रोजनी क्षार + शर्करा `rarr` न्यूक्लियोसाइड
(g) न्यूक्लियोटाइड + न्यूक्लियोटाइड `rarr` न्यूक्लिक ऐसिड।
(iv) अणु समूहों एवं प्राथमिक कोशिका का निर्माण- इसमें प्रोटीन अणुओं ने व्यवथित होकर दीर्घाणु बनाये, जिन्हे माइक्रोस्फीयर्स कहा गया। माइक्रोस्फीयर्स ने संगठित होकर कोएसरवेट का निर्माण किया। इसके बाद कोएसरफेट तथा न्यूक्लिक ऐसिड ने मिलकर ऐसी इकाई का निर्माण किया, जिसमे स्व-द्विगुणन तथा आनुवंशिक नियन्त्रण पाया जाता था। इसके चारो ओर प्लाज्मा झिल्ली बनी। यह पृथ्वी आरम्भिक कोशिका थी, जिसमे जल में उपस्थित दूसरे रसायन भी संयुक्त हो गये।
कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, न्यूक्लिक ऐसिड, ऐडीनोसीन फॉस्फेट, लवण-प्रथम कोशिका
(v) आरम्भिक जीवो में जैव-रासायनिक क्रियाओं का विकास- प्रारम्भिक जीव वातावरण में उपस्थित रासायनिक पदार्थो को ही भोजन के रूप में लेते थे अर्थात ये विषमपोषी थे। इनसे उत्परिवर्तन तथा प्राकृतिक चयन के द्वारा रसायन संश्लेषी जीव बने जिनसे नीले हरे शैवालों का उत्परिवर्तन तथा चयन द्वारा विकास हुआ। जिसके कारण वातावरण में `O_(2)` बनी, जिसे ऑक्सीजन क्रान्ति कहा गया। स्वतंत्र `O_(2)` बनने से ऑक्सी-श्वसन का विकास हुआ और जीवो को पर्याप्त ऊर्जा मिली जिसके कारण इनके विकास दर में वृद्धि हुई। इनसे ही यूकैरियोटिक जीव विकसित हुए।
(vi) विकसित जीवो का निर्माण- यूकैरियोटिक कोशिका वाले जीव जैव विकास के द्वारा विकसित जीव जातियों में बदल गये।