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BIOLOGY
जैव-विकास एक निरन्तर चलते रहने वाली प्रक...

जैव-विकास एक निरन्तर चलते रहने वाली प्रक्रिया है, समझाइए। जैव विकास के पक्ष में कोई तीन प्रमाण दीजिए।

लिखित उत्तर

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जैव विकास अत्यन्त धीमी गति से अनवरत चलने वाली अदृष्टव्य (नहीं दिखने वाली) प्रक्रिया है, जिसका अध्ययन जीव इतिहास के अध्ययन से ज्ञात होता है। यदि हम भूगर्भीय चक्र के द्वारा घोड़े के विकास का अध्ययन करे तो पता चलता है कि करोड़ो वर्ष पूर्व घोडा, बकरी के बराबर था, लेकिन धीरे-धीरे आज के घोड़े में रूपान्तरित हो गया।
जैव विकास के प्रमाण- जैव विकास के पक्ष में तीन प्रमाण निम्नानुसार है-
1. भ्रूणीकी से प्रमाण- किसी जीव के भ्रूणीय विकास को व्यक्तिवृत्ति कहते है, जबकि किसी जाति के विकास को जातिवृत्ति कहते है। हिकल के अनुसार, व्यक्तिवृत्ति जातिवृत्ति की पुनरावृत्ति करती है अर्थात किसी जीव के भ्रूणीय विकास में वे सभी अवस्थाएँ पायी जायेंगी जिनसे होकर उसकी जाति का विकास हुआ है। अगर हम मनुष्य, पक्षी तथा मछली के भ्रूणीय विकासो का अध्ययन करे तो उनमे समानताएँ पायी जाति है, जो इस बात को प्रमाणित करते है कि मानव जाति का विकास मछली तथा पक्षी से होकर हुआ होगा अर्थात भ्रूणीकी का अध्ययन जैव विकास को प्रमाणित करता है।
2. जीवाश्मो से प्रमाण- यदि पुराने जीवो के अवशेषों अर्थात जीवाश्मों का अध्ययन किया जाता है, तो यह देखने को मिलता है कि जो जीवधारी इस पृथ्वी पर एक समय प्रभावी रूप में उपस्थित थे वे आज नहीं है अथवा यदि है, तो उस रूप में नहीं है। उनमे काफी परिवर्तन हो चुका है। यह परिवर्तन सरल से जटिल की ओर दिखाई देता है जो इस बात को प्रमाणित करता है कि जैव विकास हुआ है। जीवाश्मों के सूक्ष्म अध्ययन से जैव विकास होने के प्रमाण के रूप में निम्नलिखित तथ्य सामने आते है- (ii) समय के साथ पृथ्वी की सतह एवं इसके बाद अकशेरुकी ओर सबसे अन्त में कशेरुकी जन्तु बने। (ii) पुराने जीवाश्म रचना में सरल थे, जिनमे क्रम से जटिलता आती गयी इससे यह सिद्ध होता है कि विकास सरलता से जटिलता की ओर हुआ। (iii) सबसे पहले प्रोटोजोअन इसके बाद अकशेरुकी और सबसे अन्त में कशेरुकी जन्तु बने। (iv) कई जीवाश्म संयोजक कड़ी बनाते है। ये कड़ियाँ विकासात्मक सम्बन्धो को दर्शाती है। (v) कुछ जीव बनने के बाद पृथ्वी में हुए बड़े परिवर्तनों के प्रति अनुकूलित न होने के कारण विलुप्त हो गये। (vi) जन्तुओं में स्तनी तथा पादपों में आवृत्तबीजी सबसे विकसित एवं आधुनिक जीव है। (vii) जीवाश्मों का अध्ययन कई जीवो जैसे-घोड़े, हाथी, पक्षी एवं मनुष्य के पूर्ण विकास को समझकर जैव विकास होने को प्रमाणित करता है।
3. शरीर रचना से प्रमाण- शरीर रचना से जैव विकास को निम्नलिखित अंगो के उदाहरण द्वारा समझाया जा सकता है-
(i) समजात अंग- जीवो के वे अंग जो रचना उत्पत्ति में समान होते है, समजात अंग कहलाते है। जैसे- मनुष्य का हाथ, घोड़े का अग्रपाद, व्हेल के फ्लिपर, चमगादड़ के पंख आदि। समजात अंग इस बात को प्रमाणित करते है कि इन जीवो में विकासात्मक सम्बन्ध है अर्थात जीवो में जैव विकास हुआ है।
समवृत्ति अंग- वे अंग जो रचना उत्पत्ति में भिन्न-भिन्न होते भी एकसमान कार्य करते है समवृत्ति अंग कहलाते है, जैसे- चमगादड़ तथा तितली के पंख। ये अंग इस बात को प्रमाणित करते है कि इन अंगो को धारण करने वाले जीव विकासात्मक दृष्टि से भिन्नता प्रदर्शित करते है।
(iii) अवशेषी अंग- वे अंग जो जीव शरीर में तो होते है, लेकिन कोई कार्य नहीं करते अवशेषी अंग कहलाते है। इस को दर्शाते है कि क्रियाशील रहे होंगे, लेकिन अनुकूलन के कारण निष्क्रिय या कम विकसित हो गये। अर्थात ये जीवो में होने वाले परिवर्तन या जैव विकास को प्रमाणित करते है।
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