बायोपोटेंट-आज बहुराष्ट्रीय कंपनियां बायोपाइरेसी के द्वारा जैविक संसाधनों का दुरुपयोग कर रही हैं जिसके कारण खोजकर्ताओं को उनके अनुसंधान कार्य का लाभ नहीं मिल पाता है। इसे रोकने के लिए ही बायोपोटेन्ट प्रारंभ किया गया है। इसके अन्तर्गत अन्वेषण का एक विशिष्ट समय तक लाभ दिलाने, उनके द्वारा उत्पादित सामग्री के उत्पादन, दोहन, उपयोग तथा विक्रय संबंधी अधिकार प्रदान किया जाता है। आज विभिन्न उत्पादों का उत्पादन करने वालों कपानयों को उत्पादन एवं टेक्नोलॉजी तैयार करने का अधिकार दिया जाता है जिसके द्वारा वे अपनी तकनाक एवं उत्पाद का उपयोग करते हैं। ये कंपनियाँ चाजार में अपना प्रतिद्वंद्वी रोकने के लिए पोटेन्ट का सहारा लेतो है। पटन्ट के कारण ये कंपनियाँ अत्यधिक लाभ कमाती हैं तथा उनकी तकनीक का उपयोग करने वाले से बड़ी रायल्टो वसूलती है। बहुत-सी कंपनियां अनाधिकृत वायोपोटेन्ट भी करवा लेती हैं जिसके कारण विकासशाल देशीं को अत्यधिक हानि होती हैं। इसी कारण आज विश्व में जैव पाइरेसी एवं बायोपोटेन्ट के विरुद्ध संघर्ष को स्थिति आ गई है क्योंकि जैव संसाधन के प्रमुख या घारक तथा किसानों एवं स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
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