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PHYSICS
नाभिकीय रिएक्टर क्या है? इसकी संरचना एवं...

नाभिकीय रिएक्टर क्या है? इसकी संरचना एवं उपयोगिता लिखिए?

लिखित उत्तर

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नाभिकीय रिएक्टर या परमाणु रिएक्टर, रेडियोएक्‍टिव पदार्थ जैसे U-235 से नियंत्रित श्रृंखला अभिgtक्रिया द्वारा परमाणु शक्‍ति प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त भट्टी है।
(i) नाभिकीय ईंधन- नाभिकीय ईंधन के रूप में सामान्यतः `.^(235)U` या `.^(239)Pu` का उपयोग किया जाता है। नाभिकीय ईंधन छड़ों के रूप में होते हैं जिन्हें ऐल्युमिनियम पात्र में बंद करके रखा जाता है। इन्हें ईंधन तत्व कहते हैं।‌

(ii) मंदक- नाभिकीय विखंडन में उत्पन्न तीव्रगामी न्यूट्रॉनों को मंद करने के लिए मंदकों का उपयोग किया जाता है। रिएक्टर में ईंधन तत्व एक –रूसरे के समांतर रखे हेाते हैं। जो मंदकों के द्वारा एक –दूसरे से पृथक होते हैं। मंदकों के रूप में प्रायः जल, भारी जल, ग्रेफाइट आदि प्रयुक्त किये जाते हैं। इनमें से भारी जल सबसे उत्तम समझा जाता है। इन मंदकों में प्रोटॉनों की बहुलता होती है।
जब तीव्रगामी न्यूट्रॉन मंदकों के प्रोटॉनों से सीधे संघट्ट करते हैं तो अपनी ऊर्जा प्रोटॉनों को हस्तांतरित कर देते हैं। जिससे न्यूट्रॉन मंद पड़ जाते हैं। इन न्यूट्रॉनों को तापीय न्यूट्रॉन कहते हैं। ये न्यूट्रॉन `.^(235)U` का विखंडन करते हैं।
(iii) नियंत्रक छड़- रिएक्टर में नाभिकीय विखंडन की क्रिया पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है। नियंत्रक के रूप में कैडमियम या बोरॉन की छड़ें प्रयुक्त की जाती हैं। इन छड़ों को नियंत्रक छड़ कहते हैं। ये छड़ें न्यूट्रॉनों को अवशोषित कर लेती हैं जिससे नाभिकीय विखंडन नियंत्रित हो जाता है।
न्यूट्रॉनों के अवशोषण की क्रिया को निम्न नाभिकीय अभिक्रिया द्वारा व्यक्त किया जात सकता है-
`._(5)^(10)B+._(0)^(1)nto._(2)^(4)He+._(3)^(7)Li`
रिएक्टर की दीवारेां में बने छेदों में इन छड़ों को रखकर तथा आवश्यकतानुसार उन्हें अंदर-बाहर करके नाभिकीय विखंडन की क्रिया को नियंत्रित किया जाता है।
(iv) शीतलक- नाभिकीय विखंडन की क्रिया में अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है, इस ऊष्मा को अवशोषित करने के लिए जो पदार्थ प्रयुक्त किये जाते हैं उन्हें शीतलक कहते हैं । शीतलक के रूप में प्रायः भारी जल या द्रव सोडियम को रिएक्टर में प्रवाहित किया जाता है। शीतलक द्वारा अवशोषित ऊष्मा का उपयोग भाप बनाने में किया जाता है जिससे जनरेटर को चलाया जाता है।
v.परिरक्षक- रिएक्टर में नाभिकीय विखंडन कि क्रिया में कई प्रकार की किरणें उत्सर्जित होती है जो रिएक्टर के पास कार्य करने वाले व्यक्‍तियों को हानि पहुंचा सकती हैं। इन किरणों से सुरक्षा के लिए रिएक्टर के चारों ओर क्रांक्रीट की मोटी-मोटी दीवारें बना देते हैं। इन दीवारों की मोटाई लगभग 2 मीटर होती है। इन्हें परिरक्षक कहते हैं।
कार्य-विधि- रिएक्टर को चालू करने के लिए नियंत्रक छड़ें बाहर खींच ली जाती हैं जिससे पहले से ही उपस्थित कुछ न्यूट्रॅान `.^(235)U` का विखंडन शुरू कर देते हैं। इस विखंडन के फलस्वरूप तीव्रगामी न्यूट्रॉन उत्पनन होते हैं। तीव्रगामी न्यूट्रॉन मंदक से टकराते हैं जिससे उनकी गति मंद पड़ जाती है। ये मंद न्यूट्रॉन अन्य `.^(235)U` को विखंडित करना प्रारंभ कर देते हैं। जिससे रिएक्टर में श्रृंखला अभिक्रिया प्रारंभ हो जाती है। इस श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रक छड़ों की सहायता से नियंत्रित किया जाता है।
नाभिकीय रिएक्टर का उपयोग- (i) रेडियो आइसोटोपों के उत्पादन में।
(ii) अधिक पैमाने पर ऊर्जा के उत्पादन में।
(iii) प्लूटोनियम के उत्पादन में, प्लूटोनियम `(.^(239)Pu)` यूरेनियम `(.^(235)U)` की तुलना में अच्छा विखंडनीय होता है।
(iv) अनुसंधान कार्यों के लिए।
(v) जलपोतों, वायुयानों आदि के नोदन में।
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