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PHYSICS
ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्र से आप क्...

ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्र से आप क्या समझते है ? निवेशी एवं निर्गत अभिलाक्षणिक वक्रों को आलेख द्वारा दर्शाते हुए व्याख्या कीजिए एवं निवेशी प्रतिरोध तथा निर्गत प्रतिरोध के लिए व्यंजक लिखिए ।

लिखित उत्तर

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ट्रांजिस्टर परिपथ की किसी भी विधि में विभिन्न धाराओं और वोल्टेज के बीच खींचे गये वक्रों को ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्र कहते है ।
निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र - इसके लिए संग्राहक वोल्टेज `V_(ce)` को नियत रखकर , उत्सर्जक वोल्टेज और आधार धारा में सम्बन्ध दर्शाने वाले ग्राफ को निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र कहते है । इस ग्राफ से निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले जा सकते है -
(i) उत्सर्जक वोल्टेज `V_(be)` के मान में थोड़ा भी परिवर्तन करने पर आधार धारा के मान में तेजी से परिवर्तन होने लगता है।
(ii) संग्राहक वोल्टेज `V_(ce)` के मान में थोडा - सा भी परिवर्तन करने पर अभिलाक्षणिक वक्र में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता ।

निवेशी प्रतिरोध - नियत संग्राहक वोल्टेज पर उत्सर्जक वोल्टेज में परिवर्तन और आधार धारा में परिवर्तन के अनुपात को निवेशी प्रतिरोध कहते है । यदि नियत संग्राहक वोल्टेज `V_(ce)` पर उत्सर्जक वोटलेज में परिवर्तन `Delta V_(be)` तथा आधार धारा में परिवर्तन `Delta I_b` हो , तो निवेशी प्रतिरोध `r_(i)=((Delta V_be)/(Delta I_b))_(V_(ce)"नियत")`
2. निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र - आधार धारा नियत होने पर संग्राहक वोल्टेज और संग्राहक धारा में सम्बध दर्शाने वाले ग्राफ को निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र कहते है । निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र से निम्न निष्कर्ष निकने जा सकते है -
(i) संग्राहक धारा `I_(e)` का मान संग्राहक वोल्टेज `V_(ce)` के साथ इसे बहुत कम (1 वोल्ट से कम ) मान के लिए ही परिवर्तित होता है ।

(ii) जब संग्राहक वोल्टेज `V_(ce)` का मान 1 वोल्ट या 2 वोल्ट से अधिक किया जाता है तो संग्राहक धारा `I_c` का मान लगभग नियत रहता है । इसे क्षैतिज रेखा द्वारा द्वारा प्रदर्शित किया जाता है ।
(iii) आधार धारा `I_(b)` का मान बड़ा देने पर संग्राहक धारा `I_(c)` का मान भी बढ़ जाता है । इस प्रकार धारा का मान संग्राहक वोल्टेज पर निर्भर नहीं करता , आधार धारा पर निर्भर करता है ।
निर्गत प्रतिरोध - आधार धारा के नियत पर संग्राहक वोल्टेज में परिवर्तन और संग्राहक धारा में परिवर्तन के अनुपात को निर्गत प्रतिरोध कहते है । यदि आधार धारा `I_b` के नियत होने पर संग्राहक वोल्टेज में परिवर्तन `Delta V_(ce)` तथा संग्राहक धारा में परिवर्तन `Delta I_(c)` हो , तो निर्गत प्रतिरोध `r_0 =((Delta V_(ce))/(DeltaI_c))_(I_b"नियत ")`।
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