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Class 12
PHYSICS
नामांकित चित्र खींचकर N-P-N ट्रान्जिस्टर...

नामांकित चित्र खींचकर N-P-N ट्रान्जिस्टर का दोलित्र के रूप में उपयोग का वर्णन निम्न शीर्षकों में कीजिए -
1. सिद्धान्त, 2. परिपथ , 3. कार्य विधि ।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

सिद्धान्त - L-C परिपथ पर्दर्शित किया गया है । इसमें L कुण्डली ,C संधारित्र B बैटरी `K_1` तथा `K_2` दाब कुन्जियों है । कुंजी `K_1` को दबाने पर C आवेशित हो जाता है । `K_1` को छोड़कर `K_2` को दबाने पर कुण्डली L में से आवेश का विसर्जन होने लगता है । कुण्डली अपने प्रेरकत्व के कारण इसका विरोध करती है , अतः निरावेशन की दर कम हो जाती है । इस क्रिया में संधारित्र विधुत ऊर्जा को खोता जाता है जिसे कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र की ऊर्जा के रूप में प्राप्त करने लगती है । जब संधारित्र पूर्णतः निरावेशित हो जाता है , तो सम्पूर्ण ऊर्जा कुण्डली में चुम्बकीय क्षेत्र की ऊर्जा के रूप में एकत्रित हो जाती है ।

कुण्डली उसी दिशा में धारा प्रवाह को जारी रखना चाहती है , जब संधारित्र पूर्णतः आवेशित हो जाता है तो इसका पुनः निरवेशन होने लगता है और आगे इसी चक्र की पुनरावृति होती रहती है । यही दोलित्र का सिद्धान्त है ।
परिपथ-

3. कार्य विधि - दाब कुंजी K को दबाते ही संग्राहक उत्सर्जक परिपथ में संग्राहक धारा बहने लगती है जिससे संधारित्र `C_1` आवेशित होने लगता है । जब संधारित्र पूर्णतः आवेशित हो जाता है तो कुण्डली `L_1` में उसका निरावेशन होने लगता है । फलस्वरूप L-C परिपथ में विधुत दोलन प्रारम्भ हो जाते है । आधार उत्सर्जक की कुण्डली `L_2,L-C` परिपथ की कुण्डली `L_1` से युग्मित रहती है , और `L_2` उचित रूप में युग्मित रहते है , अतः L-C परिपथ को प्राप्त ऊर्जा इस परिपथ में हो रहे विद्दुत दोलनों को कुण्डली `L_3` के सिरों के मध्य प्राप्त किया जा सकता है ।
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