मानलो AB एक चालक है, जिसमें I विद्युत् धारा प्रवाहित हो रही है तब इस धाराबाही चालक के एक अल्पांश द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता dB-
(i) चालक में बहने वाली धारा I के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात्
`dBpropI`
(ii) चालक के उस अल्पांश की लम्बाई dl के अनुक्रमानुपाती होता है अर्थात् ltbgt `dBpropdl`
(iii) अल्पांश की लम्बाई और अल्पांश को बिन्दु P से मिलाने वाली रेखा के बीच बनने वाले कोण `theta` की ज्या (sine) के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात्
`dBpropsintheta`
(iv) अल्पांश से बिन्दु P के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात्
`dBprop1/(r^(2))`
उपर्युक्त चारों को मिलाकर लिखने पर,
`dBprop(I.dl.sintheta)/(r^(2))`
या `dB=K.(I.dl.sintheta)/(r^(2))`
जहाँ, K एक आनुपातिक नियतांक है, जिसका मान मापन की पद्धति पर निर्भर करता है।
M.K.S. पद्धति में, K =`(mu_(0))/(4pi)= 10^(-7)` न्यूटन/ ऐम्पिय`र^(2)`
`dB=10^(-7).(I.dl.sintheta)/(r^(2))`
उपर्युक्त सूत्र में यदि dl = 1 मीटर, r = 1 मीटर, sin `theta` = 1 अर्थात् `theta` = 90° तथा dB = `10^(-7)` वेबर/मीट`र^(2)` हो, तो I = 1 ऐम्पियर।
अतः 1 ऐम्पियर वह विद्युत् धारा है, जो 1 मीटर त्रिज्या के 1 मीटर लम्बाई के चाप में प्रवाहित करने पर चाप के केन्द्र पर `10^(-7)` वेबर/मीट`र^(2)` का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न कर दे।