हाइड्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन जब नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाता है तो उस पर दो प्रकार के बल कार्यरत रहते हैं
(1) नाभिक के द्वारा लगाया गया आकर्षण बल
`=(Ze^2)/(r^2)`
(2) अपकेन्द्री बल जो इलेक्ट्रॉन को बाहर की ओर खींचता है।
अपकेन्द्री बल ` = (mv^2)/(r)`
यहाँ पर e = आवेश, m = द्रव्यमान, r = त्रिज्या, v= वेग तथा Z = परमाणु क्रमांक है। गतिमान इलेक्ट्रॉन पर अभिकेन्द्री बल एवं अपकेन्द्रीय बल बराबर और विपरीत दिशा में कार्य करते हैं, इसलिए इलेक्ट्रॉन अपनी स्थिति पर संतुलित अवस्था में गतिमान रहता है।
`(Ze^2)/(r^2) = (mv^2)/(r)`
`(Ze^2)/(r) = mv^2`
बोर अनुसार , `mvr = (nh)/(2pi)`
` v= (nh)/(2pimr)`
`because H` परमाणु के लिए Z = 1 होता है
`(e^2)/(r) = mv^2`
`(e^2)/(r) = (mn^2)/(4p^2 m^2r^2)`
`e^2 =(n^2h^2)/(4p^2 mr)`
` r= (n^2h^2)/(4pi^2me^2)`
यह व्यंजक बोर की त्रिज्या कहलाता है |