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PHYSICS
एक कण x=-A तथा x=+A के बीच सरल आवर्त गत...

एक कण x=-A तथा x=+A के बीच सरल आवर्त गति कर रहा है यह 0 से `A//2` तक जाने में `T_1` समय लेता है तथा `A//2` से A तक जाने में `T_2` समय लेता है तब ,

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A boat takes half time in moving a certain distance downstream than upstream. The ratio of the speed of the boat in still water and that current is एक नाव की किसी निश्चित दूरी को धारा के विपरीत दिशा में जाने मे लगे समय की अपेक्षा धारा के दिशा मे जाने में आधा समय लगता है। शांत जल मे नाव और धारा की गति का अनुपात क्या है?

The speed of a boat in still water is 6 km/h. If it takes four times more time to go against the current than to go in the direction of the current, what will be the speed of the current ? / शांत जल में एक नाव की गति 6 km /h है | यदि इसे धारा की दिशा में जाने की तुलना में धारा के विपरीत जाने में चार गुना अधिक समय लगता है तो धारा की गति क्या होगी ?

A boat goes a distance of 4 km upstream in 2 hours and the same distance downstream in 20 minutes. How long will it take to go 10 1/2 km in still water? एक नाव 2 घंटे में 4 किमी धारा के प्रतिकूल जाती है और धारा के अनुकूल इतनी ही दूरी 20 मिनट में तय करती है | स्थिर जल में 10 1/2 किमी तक जाने में इसे कितना समय लगेगा ?

A man can row at 10 kmph in still water. If it takes a total of 5 hours for him to go to a place 24 km away and return, then the speed of the water current is:- एक आदमी शांत जल में 10 किमी/घंटे को चाल से चल सकता है। यदि वह 24 किमी दूर किसी स्थान पर जाने तथा आने में 5 घंटे का समय लेता है, तो पानी की धारा की चाल ज्ञात कीजिए।

दो पानी के नल एक साथ एक हौज को 9(3)/(8) घंटो में भर सकते है । बड़े व्यास वाला नल हौज को भरने में , कम व्यास वाले नल से 10 घंटे कम समय लेता है । प्रत्येक द्वारा अलग से हौज को भरने के समय ज्ञात कीजिए ।

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। गद्यांश में आदर्श विद्यार्थी के किन गुणों की चर्चा की गई है?

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। गद्यांश में 'वृक्ष किसे कहा गया है?

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। किन शब्दों में 'इत' प्रत्यय है?

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। 'संसार को सौरभ' देने का अर्थ है

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