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Class 12
PHYSICS
प्रश्न - संख्या 16 में दी गई कुंडली (R =...

प्रश्न - संख्या 16 में दी गई कुंडली `(R = 100 Omega, L = 0.50 H)` को उच्च आवृति के acस्रोत `(240 V, 10 kHz)`से यदि जोड़ा जाए तो उस प्रश्न के भाग (a) एवं भाग (b) के उत्तर दें । प्राप्त उत्तर के आधार पर इस कथन की व्याख्या करें कि अति उच्च आवृत्ति पर किसी परिपथ में प्रेरक कुंडली (inductor) लगभग खुले परिपथ (open circuit) के तुल्य होता है । किसी दिष्ट धारा परिपथ (d.c.circuit) में स्थायी स्थिति (steady state) आने पर प्रेरित्र (inductor) किस प्रकार का व्यवहार करता है ?

लिखित उत्तर

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प्रश्न से ,`L = 0.50 H, R = 100 Omega`
आभासी वोल्टता `E_(v) = 240 V`, आवृत्ति `f = 10 kHz = 10^(4) `Hz
(a) परिपथ की प्रतिबाधा (impedance),
` Z = sqrt(R^(2)+omega^(2)L^(2)) = sqrt(R^(2) + (2 pi fL)^(2))`
` = sqrt((100 Omega)^(2) + [2xx3.14 xx(10^(4)s^(-1))(0.50 H)]^(2))`
` = sqrt(10^(4) + (3.14 xx 10^(4))^(2)) Omega = 3.14 xx 10^(4) Omega = 31400 Omega`.
` :. ` धारा का शिखर मान , `I_(0) = E_(0)/Z = (sqrt2E_(v))/Z = (1.414(240 V))/((31400 Omega))`
` = (339.36 V)/(31400 Omega) = 0.011 A = 1.1 xx 10^(-2) A`.
धारा का यह मान प्रश्न - संख्या 16 के भाग (a) में प्राप्त मान `(1.82 A)` की तुलना में बहुत छोटा है । स्पष्टतः , उच्च आवृत्ति पर प्रेरकत्व का प्रतिघात `X_(L)` बहुत बड़ा होने के कारण परिपथ को खुला परिपथ (open circuit) जैसा मान सकते है ।
दिष्ट धारा परिपथ (d.c. circuit) में L-R परिपथ के साथ स्थायी स्थिति आने पर प्रेरकत्व से प्रवाहित धारा नियम हो जाती है तथा धारा का मान `E/R` नहीं बदलता है । प्रेरित्र मात्र एक चालक जैसा व्यवहार करता है ।
(b) धारा एवं वोल्टेज के बीच कलांतर
`phi = tan^(-1) ((omegaL)/R) = tan^(-1)((2pi xx 10^(4) xx 0.5)/100)`
` = tan^(-1) (100 pi) = tan^(-1)(314)=89.8^(@) approx 90^(@) = pi/2 `.
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