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Class 12
PHYSICS
+2 मिक्रोकुलोम तथा +8 मिक्रोकुलोम के दो ...

`+2` मिक्रोकुलोम तथा +8 मिक्रोकुलोम के दो बिंदु आवेश परस्पर 16 न्यूटन के बल से प्रतिकर्षित करते है। (i) यदि इन आवेशों में से प्रत्येक को -4 मिक्रोकुलोम का आवेश और दिया जाए तो अब बल कितना होगा? (ii) यदि प्रत्येक को -2 मिक्रोकुलोम का आवेश दिए जाए तो अब बल कितने होगा?

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आंकड़ों 2 ,5 ,6 ,x ,4 ,3 का माध्य 5 है। अब यदि x के स्थान पर 16 कर लिया जाए तो माध्य कितना बढ़ जाएगा ?

यदि प्रत्येक को कम से कम 2 किताबें मिलती हैं तो 3 छात्रों के बीच 8 अलग-अलग पुस्तकों को कैसे वितरित किया जा सकता है?

यदि प्रत्येक को कम से कम 2 किताबें मिलती हैं तो 3 छात्रों के बीच 8 अलग-अलग पुस्तकों को कैसे वितरित किया जा सकता है?

The average of some numbers is 54.6. If 75% of the numbers are increased by 5.6 each and the rest are decreased by 8.4 each, then what is the average of the numbers so obtained? कुछ संख्याओं का औसत 54.6 है | यदि इन संख्याओं के 75% में से प्रत्येक को 5.6 से बढ़ा दिया जाए तथा शेष में से प्रत्येक को 8.4 से कम कर दिया जाए, तो इस प्रकार प्राप्त होने वाली संख्याओं का औसत क्या होगा ?

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक ने अनूठी शिक्षा में ____ बल दिया है।

हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। हमारे व्यवहार और कार्य स्वयं ठीक से हो जाएंगे यदि हम