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Class 11
PHYSICS
एक सरल लोलक का पृथ्वी-तल पर दोलनकाल 5.0 ...

एक सरल लोलक का पृथ्वी-तल पर दोलनकाल 5.0 सेकण्ड है पृथ्वी-तल से `R_e` (पृथ्वी की त्रिज्या ) ऊंचाई पर दोलनकाल कितना होगा

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A solid is hemispherical at the bottom and conical above. If the surface areas of the two parts are equal, then the ratio of radius and height of its conical part is एक ठोस तल पर अर्द्ध गोलाकार है और ऊपर शंक्वाकार। यदि दोनों भागों के पृष्ठ क्षेत्रफल बराबर है, जो उसके शंक्वाकार भाग की त्रिज्या और ऊँचाई का अनुपात है-

The volume of a right circular cone is equal to that of a sphere, whose radius is half the radius of the base of the cone. What is the ratio of the radius of the base to the height of the cone ? एक लम्ब वृत्तीय शंकु का आयतन उस गोले के आयतन के बराबर है, जिसकी त्रिज्या शंकु के आधार की त्रिज्या से आधी है | शंकु के आधार की त्रिज्या और शंकु की ऊंचाई में क्या अनुपात है ?

An aeroplane flying horizontally at a height of 3 Km. above the ground is observed at a certain point on earth to subtend an angle of 60^@ . After 15 sec flight, its angle of elevation is changed to 30^@ . The speed of the aeroplane (taking sqrt3 = 1.732) is- कोई वायुयान पृथ्वी की सतह से 3 कि.मी. ऊपर क्षेतिज उड़ रहा है। पृथ्वी से किसी बिन्दु से यह देखने में आता है कि वह 60^@ के कोण पर कक्षांतरित होता है। 15 सेकण्ड बाद उसका उन्नयन कोण 30^@ परिवर्तित हो जाता हैं वायुयान की चाल बताइए। ( sqrt3 =1.732)

The compound interest on a certain sum at 16 2/3 %p.a. for 3 years is ₹ 6,350. What will be the simple interest on the same sum at the same rate for 5 2/3 years? एक निश्चित राशि पर 16 2/3 % प्रति वर्ष की दर से 3 वर्षों का चक्रवृद्धि ब्याज 6,350 रुपये है | इसी राशि पर इसी दर से 5 2/3 वर्षों का साधारण ब्याज कितना होगा ?

N solid metallic spherical balls are melted and recast into a cylindrical rod whose radius is 3 times that of a spherical ball and height is 4 times the radius of a spherical ball. The value of N is : N ठोस धात्विक गोलाकार गेंदों को पिघलाकर एक बेलनाकार छड़ बनाया जाता है जिसकी त्रिज्या एक गोलाकार गेंद की त्रिज्या से तिगुनी है और ऊंचाई एक गोलाकार गेंद की त्रिज्या से चोगुनी है |N का मान है :

Base of a right pyramid is a square of side 10 cm. If the height of the pyramid is 12 cm,then its total surface area is- एक लंब पिरामिड का आधार 10 सेमी भुजा का वर्ग है। यदि पिरामिड की ऊंचाई 12 सेमी है, तो कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल कितना होगा?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ. वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्यों पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा। किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों। और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। गंगा-यमुना को जल कहाँ से मिलता है?

हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ, वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ सम्बन्ध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्वो पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रान्ति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल-बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में । लाने की भी आवश्यकता है। गंगा-यमुना को जल कहाँ से मिलता है?