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PHYSICS
कार्बन प्रतिरोधक के सिरों पर 50 वोल्...

कार्बन प्रतिरोधक के सिरों पर 50 वोल्ट विभवान्तर लगाया जाता है । प्रतिरोधक पर प्रथम , द्वितीय एवं तृतीया वलयों के रंग क्रमशः लाल , पीला एवं नारंगी हैं । प्रतिरोधक में धारा का मान ज्ञात किजिए ।

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आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। व्यक्ति की भाषा एवं व्यवहार में उसके क्षेत्र विशेष का प्रभाव स्पष्ट दिखाई पड़ता है, इसे निम्नलिखित में से किसके अन्तर्गत रखा जा सकता है?

निर्देश: निम्नलिखित गद्यान्श के आधार पर प्रश्न तक के उत्तर दीजिए: ?"मानव के पास समस्त जगत को देखने-परखने के दो नजरिए हैं एक आशावादी, दूसरा निराशावादी। इसे सकारात्मक और नकारात्मक दृष्टि भी कहते हैं। जो आशावादी या सकारात्मक मार्ग पर चलते हैं, वे सदैव आनन्दकी अनुभूति प्राप्त करते हैं तथा निराशावादी या नकारात्मक दृष्टि वाले दुःख के सागर में डूबे रहते हैं और सदा अपने आपको प्रस्थापित करने के लिए तर्क किया करते हैं। वे भूल जाते हैं कि तर्क और कुर्तक से ज्ञान का नाश होता है एवं जीवन में विकृति उत्पन्न होती है। आशावादी तर्क नहीं करता, फलस्वरूप वह आंतरिक आनन्द की प्रतीति करता है। वह मानता है कि आत्मिक आनंद कभी प्रहार या काटने की प्रक्रिया में नहीं है। इसीलिए जगत में सदा आशावाद ही पनपा है, उसने ही महान व्यक्तियों का सृजन किया है। निराशावाद या नकारात्मकता की नींव पर कभी किसी जीवन प्रासाद का निर्माण नहीं हुआ। 'वे' सर्वनाम है

विद्यालय समाज की एक ऐसी संस्था है, जिसके कुछ सुनिश्चित एवं सुनिर्धारित लक्ष्य होते हैं, जबकि समुदाय का तात्पर्य ऐसे समूह से है जिसमें एक प्रकार के लोग होते हैं। यह एकत्व आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक या नागरिक गुणों में हो सकता है। कई समुदाय अपने लिए अलग विद्यालय की स्थापना भी कर लेते हैं। अपनी औपचारिक भूमिकाओं के अलावा अन्य भूमिकाओं के निर्वहन में भी विद्यालय समुदाय की सहायता करता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर समुदाय के क्रिया-कलापों में वह हस्तक्षेप भी करता है। उदाहरणस्वरूप प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियों को अभिभावकों तक पहुँचाने में भी विद्यालय यथासम्भव समुदाय की सहायता करता है एवं आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप भी करता है। अभिभावक एवं विद्यालय एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं। अभिभावक समुदाय की आवश्यकताओं से परिचित होते हैं तथा विद्यालय को भी इनसे अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर बीच की व्यवहार्य कड़ी का काम करते हैं। उदाहरणस्वरूप समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप अभिभावकगण प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा इत्यादि में सहायता के लिए विद्यालय से अनुरोध करते हैं। इस तरह वे विद्यालय एवं समुदाय के बीच की व्यवहार्य कड़ी हैं। समुदाय के साथ निकट से जुड़ कर कार्य करने की स्थिति में विद्यालय अधिक प्रभावशाली हो जाता है। समुदाय और विद्यालय को जोड़ने में समाज के लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। समुदाय के क्रिया-कलापों में विद्यालय की भागीदारी होती है। यही कारण है कि विद्यालयों के लिए पाठ्यवस्तु इतना लचीला बनाया जाता है कि उसमें समाज के विभिन्न समुदायों की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखा जाए। जल संरक्षण की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर में भी इनके संरक्षण के नियमों का पालन होता हो। इस तरह समुदाय की वास्तविकताओं को प्रायोगिक रूप से विद्यालय परिसर में प्रयोग कर उसे अधिगम अनुभवों में रूपान्तरित किया जा सकता है। प्रस्तुत गद्यांश में किसके द्वारा हस्तक्षेप की चर्चा की गई है?

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