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PHYSICS
परावैघुत क्या है। ध्रुवीय और अध्रुवीय...

परावैघुत क्या है। ध्रुवीय और अध्रुवीय परावैघुत को उदाहरण सहित समझाइए।

लिखित उत्तर

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परावैघुत वे पदार्थ होते है। जिनमें होकर विघुत का प्रवाह नही होता क्योकि इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते है। इन पदार्था में परमाणुओं के सभी इलेक्टॉन अपने संगत नाभिकों से इतने सशक्त रूप से दृढतापूर्वक बँधे रहते है। कि इन पदार्थो पर बाह्रा विघुत क्षेत्र आरोपित करने पर इन्हे अलग नहीं किया जा सकता है।
जब परावैघुत पदार्थो पर विघुत – क्षेत्र आरोपित किया जाता हैं तो इन पदार्थो के कक्षीय इलेक्टॉनों के समूह का केन्द्रक धनावेशित नाभिक के केन्द्रक के सापेक्ष कुछ विस्थापित हो जाता हैं जिसके कारण सूक्ष्म विघुत दिध्रुव बन जाता हैं इस प्रक्रिया को परावैधुत ध्रुवण तथा पदार्थ को ध्रुवित परावैघुत कहते है। परावैघुत दो प्रकार के होते है।
(i) ध्रुवीय परावैघुत - इन परावैधुओं के अणुओ के धन आवेश के केन्द्र तथा ऋण आवेश के केन्द्र एक- दूसरे पर सम्पाती नहीं होते है। बल्कि थोडे हटे हुए होते है जिसके कारण प्रत्येक अणु एक विघुत दिध्रुव होता है। यह विघुत दिध्रुव स्थायी होता है। तथा अणु को ध्रुवीय अणु कहा जाता है। बाह्रा विघुत – क्षेत्र की अनुपस्थिति में ये दिध्रुव अनियमित रूप से विन्यासित होते है। जिसके कारण पदार्थ का नैट दिध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। तथा पदार्थ अध्रुवित पदार्थ की तरह व्यवहार करता है। लेकिन जब बाह्रा विघुत क्षेत्र आरोपित किया जाता है। तो दिध्रुवों पर एक बल –आघूर्ण कार्य करता हे जो इन्हे क्षेत्र की दिशा में सरेखित करता है। और पदार्थ ध्रुवित हो जाता है। जाता है। उदाहरण – पानी `(H_(2)O)` नमक का अम्ल (HCI) आदि।
(ii) अध्रुवीय परावैधुत - इन परावैघुतो के अणुओं के धन आवेश के केन्द्र तथा ऋण आवेश के केन्द्र एक – दूसरे पर सम्पाती हेाते है। जिसके कारण प्रत्येक अणु अध्रुवीय होता है। जब बाह्रा विघुत क्षेत्र आरोपित किया जाता है। तो धन आवेश केन्द्र ऋण आवेशित केन्द्र के सापेक्ष विस्थापित हो जाता हैं। तथा अणु एक विघुत दिध्रुव बन जाता है। और पदार्थ ध्रुवित हो जाता है।
उदाहरण- ऑक्सीजन `(O_(2))` हीलियम `(He_(2))` आदि।
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