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Class 12
PHYSICS
अर्द्धतरंग दिष्टकारी (ऋजुकारी) के रूप मे...

अर्द्धतरंग दिष्टकारी (ऋजुकारी) के रूप में P-N संधि डायोड का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए, (i) परिपथ का नामांकित चित्र (ii) कार्यविधि ,तथा (iii) निवेशी विभव एवं निर्गत विभव का समय के साथ परिवर्तन आरेख।

लिखित उत्तर

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(i) परिपथ का नामांकित आरेखविशेष-निर्गत धारा । की दिशा तीर के चिह्न के द्वारा चित्र में प्रदर्शित है।

(ii) कार्यविधि-निवेशी प्रत्यावर्ती विभव के आधे चक्र में जब P सिरा धनात्मक विभव पर तथा N सिरा ऋणात्मक विभव पर होता है, तब भार प्रतिरोध `R_L` में तीर की दिशा में धारा में i प्रवाहित होती है। अत: निर्गत विभव प्राप्त होता है, परन्तु शेष आधे चक्र में जबकि P सिरा ऋणात्मक विभव एवं N सिरा धनात्मक विभव पर होता है, भार प्रतिरोध `R_L` में धारा नहीं बहती, अत: निर्गत विभव प्राप्त नहीं होता। यह क्रम लगातार चलता रहता है अर्थात् एक ही दिशा में रुक-रुककर एकान्तर क्रम में धारा प्रवाहित होती है। इस प्रकार संधि डायोड, अर्द्ध तरंग ऋजुकारी (half wave rectifier) की भाँति कार्य करता है।
(iii) परिवर्तन आरेख -
में निवेशी प्रत्यावर्ती विभव के संगत निर्गत अर्द्धदिष्ट (ऋजु) तरंग प्रदर्शित है।
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