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PHYSICS
पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifie...

पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifier) के रूप में P-N संधि दायोड का वर्णन निम्न शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए (i) परिपथ का नामांकित चित्र, (ii) कार्यविधि, (iii) निवेशी विभव तथा निर्गत विभव में परिवर्तन आरेख।

लिखित उत्तर

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(i) परिपथ का नामांकित चित्रदेखिए चित्र

विशेष-निर्गत धारा की दिशा चित्र 9.18 पर तीर के चिह्नों से प्रदर्शित है।
(ii) कार्यविधि-निवेशी प्रत्यावर्ती विभव के आधे चक्र में डायोड `D_1` का P सिरा धनात्मक विभव पर तथा डायोड `D_2` का P सिरा ऋणात्मक विभव पर होता है अर्थात् डायोड `D_1` अग्र अभिनति और `D_2` पश्च अभिनति होता है। अतः डायोड `D_1` में होकर तीर की दिशा में धारा प्रवाहित होती है परन्तु `D_2` में होकर कोई धारा प्रवाहित नहीं होती। | निवेशी प्रत्यावर्ती विभव शेष आधे चक्र में `D_1` का P सिरा ऋणात्मक विभव पर तथा `D_2` का P सिरा धनात्मक विभव पर होता है। अत: इस बार `D_1` पश्च अभिनति में और डायोड `D_2` अग्र अभिनति में होता है, अतः डायोड `D_2` में होकर कोई धारा नहीं बहती, परन्तु अब `D_2` में होकर पुनः उसी दिशा में धारा प्रवाहित हो जाती है। इस प्रकार भार प्रतिरोध के सिरों पर एक ही दिशा में लगातार निर्गत विभव प्राप्त होता रहता है।
(ii) परिवर्तन आरेख-चित्र 9.19 में निवेशी प्रत्यावर्ती विभव के संगत निर्गत पूर्ण दिष्ट (ऋजु) तरंग प्रदर्शित है।
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