(i) नामांकित चित्र -
नामांकन-X = वाष्प प्रकोष्ठ, AB = प्रायोगिक छड़, Y = सर्पिलाकार सुचालक नलिका, `T_1, T_2, T_3` एवं `T_4` थर्मामीटर, d = C एवं D खण्डों के बीच की दूरी तथा `theta_1, theta_2, theta_3, theta_4` क्रमश: `T_1, T_2, T_3` व `T_4` थर्मामीटरों में स्थायी तापीय अवस्था के ताप हैं।
(ii) सूत्र की स्थापना-जब छड़ की चालकता अधिक होती है तथा किनारों से ऊष्मा की हानि नगण्य होती है, तो समतापीय पृष्ठ छड़ की अक्ष के लम्बवत् होते हैं। यदि छड़ की त्रिज्या r हो तो समतापीय पृष्ठ का क्षेत्रफल छड़ के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल `(A = pir^2)` के बराबर होगा। यदि छड़ AB के पदार्थ का ऊष्मा चालकता गुणांक K है, तो छड़ की CD लम्बाई से जब `theta_1` व `theta_2` स्थाई ताप हों, t सेकण्ड में गुजरने वाली ऊष्मा
`theta = (KA (theta_1 - theta_2)t)/(d) " " ....(1)`
यह ऊष्मा छड़ के दूसरे सिरे पर लिपटी हुई ताँबे की नली में होकर समान दर से प्रवाहित पानी द्वारा ली जाती है। यदि अन्दर जाने वाले पानी का ताप `theta_3` व बाहर निकलने वाले पानी का ताप `theta_4` स्थिर हो तथा t सेकण्ड में पानी का m द्रव्यमान बाहर निकले तो पानी द्वारा ली गयी ऊष्मा
` theta = m (theta_4 - theta_3) ( because " जल की वि.ऊ. s = 1 ")` ...(2)
समी. (1) व (2) से,
` m (theta_4 - theta_3) = (KA ( theta_1 - theta_2)t)/(d)`
अतः ` K = (m (theta_4 - theta_3) d)/(A(theta_1 - theta_2)t) K//""^@C-cm-s`
(iii) विधि-सर्वप्रथम वाष्प प्रकोष्ठ में वाष्प प्रवाहित करते हैं, एवं प्रयोगिक छड़ AB पर B सिरे के निकट लिपटी सर्पिलाकार सुचालक नलिका में जल प्रवाहित करते हैं। स्थायी तापीय अवस्था में सर्पिल नली में जल प्रवाह को इस प्रकार नियन्त्रित करते हैं कि थर्मामीटर `T_3`एवं `T_4` में बहुत कम ताप अन्तर (लगभग `10^@C` ) रहे। अब चारों तापमापियों के पाठ नोट कर लेते हैं तथा t सेकण्ड में सर्पिल नलिका में प्रवाहित होने वाले जल का द्रव्यमान m भी ज्ञात कर लेते हैं।
(iv) प्रेक्षण-(1) पहले दो तापमापियों के बीच की दूरी d = ....... मीटर
(2) छड़ की त्रिज्या । = ....... मीटर
(3) स्थायी अवस्था में तापमापियों के पाठ्यांक
`theta_1 =............""^@C`
`theta_2 =............""^@C`
`theta_3 =............""^@C`
`theta_4 =............""^@C`
(4) t सेकण्ड में इकट्ठा हुए पानी का द्रव्यमान = .......... किग्रा
गणना-सूत्र- ` K = (m (theta_4 - theta_3)d)/(pir^2 (theta_1 - theta_2)xxt)` में
` m , theta_1, theta_2, theta_3, theta_4, d , r` तथा t का मान रखकर K के मान की गणना कर ली जाती है।
(v) सावधानियाँ-(1) सभी तापमापियों के प्रेक्षण स्थायी तापीय अवस्था में ही लिए जाने चाहिए।
(2) जल प्रवाह की दर इस प्रकार समंजित करनी चाहिए कि सर्पिल नलिका में प्रविष्ट एवं निर्गत जल का तापान्तर कम (लगभग `10^@C` ) रहे।