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Class 11
PHYSICS
तनी हुई डोरी के कम्पनों के लिए सिद्ध कीज...

तनी हुई डोरी के कम्पनों के लिए सिद्ध कीजिए कि
` x_1 : x_2 : x_3 .......... = 1:2:3`

लिखित उत्तर

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तनी हुई डोरी में प्रसामान्य विधाएँ-चूँकि अप्रगामी तरंग का विस्थापन समीकरण
` Y = 2a sin (2pi x)/(lamda) cos (2pi v t)/(lamda) " " ...(1)`
चूँकि x= 0 तथा x =l पर (अर्थात् दृढ़ सिरों पर) विस्थापन शून्य होगा, अतः सीमा शर्ते निम्नलिखित हैं :
x = 0 पर Y = 0 तथा x = l पर Y = 0 ...(2)
अत: समीकरण (1) से स्पष्ट है कि x = 0 पर Y = 0
परन्तु x = l पर Y = 0 होने के लिए `0 = 2a sin (2pil)/( lamda) cos (2pi vt )/(lamda)`
अर्थात् t के सभी मानों के लिए
` sin (2pil)/(lamda) = 0`
` (2pil)/(lamda) = 0, pi, 2pi, ... = n pi`
जहाँ n एक पूर्णांक है, अर्थात् n = 0, 1, 2, 3,....
` therefore lamda = (2l)/(n)n " " ...(3)`
कम्पन की प्रथम विधा-यदि n = 1, तो
` lamda_1 = 2l` तथा आवृत्ति `n_1 = (V)/(lamda_1) = (V)/(2l)`
यदि डोरी में तनाव T तथा डोरी की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान m है, तो अनुप्रस्थ तरंग की चाल
` v = sqrt(T/m)`
`therefore` आवृत्ति ` n_1 = (1)/(2l) sqrt(T/m) " " ...(4)` इसे मूल स्वर या प्रथम संनादी स्वर कहते हैं। यह विधा चित्र में प्रदर्शित है।
कम्पन की द्वितीय विधा-यदि n= 2, तो ` lamda_2 = (2l)/(2)` तथा आवृत्ति ` n_2 = (V)/(lamda_2) = (2V)/(2l)`
`therefore n_2 = (2)/(2l) sqrt(T/m) = 2n_1 " " ...(5)`
इसे द्वितीय संनादी या प्रथम अधिस्वरक कहते हैं। यह विधा चित्र b में प्रदर्शित है।
कम्पन की तृतीय विधा-यदि n =3, तो `lamda_3 = (2l)/(3) therefore n_3 = (V)/(lamda_3) = (3V)/(2l)`
`n_3 = (3)/(2l) sqrt(T/m) = 3n_1 " " ....(6)`
इसे तृतीय संनादी या द्वितीय अधिस्वरक कहते हैं। यह विधा चित्र c में प्रदर्शित है।
इस प्रकार, `n_1 : n_2 : n_3 : ...... = 1 : 2 : 3...`
स्पष्टतः तनी हुई डोरी में सम तथा विषम दोनों प्रकार के संनादी उत्पन्न किया जा सकते हैं।"
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