विद्युत् - रासायनिक सेल - रेडॉक्स अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारकों और अपचायकों के मध्य इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण अप्रत्यक्ष रूप से, जैसे तार जोड़कर करने पर रासायनिक ऊर्जा का परिवर्तन विद्युत् ऊर्जा में होने लगता है | इस प्रकार की गई व्यवस्था विद्युत्-रासायनिक सेल कहलाती है | इसे गैल्वेनिक या वोल्टाइक सेल भी कहते हैं | इसकी क्रियाविधि को डेनियल के उदाहरण से समझा जा सकता है |
डेनियल सेल - इस सेल में Zn धातु की छड़ `ZnSO_(4)` के विलयन में तथा Cu धातु की छड़ `CuSO_(4)` के विलयन में अलग-अलग पत्रों में डुबाकर रखी जाती है| दोनों विलयनों को `KNO_(3)` लवण - सेतु द्वारा जोड़ दिया जाता है| Zn और Cu इलेक्ट्रोडों को किसी धातु के तार और गैल्वेनोमीटर सिरे से जोड़ने पर इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह Zn से Cu की ओर बाह्य परिपथ में होने लगता है | Zn इलेक्ट्रोडों पर जिंक परमाणु `Zn^(2+)` आयन बनाकर विलयन में चले जाते है | यहाँ उपस्थित इलेक्ट्रॉन बाह्य परिपथ से Cu इलेक्ट्रोड पर पहुँचकर `CuSO_(4)` विलयन में उपस्थित `Cu^(2+)` आयनों को Cu धातु में बदल देते हैं, जो Cu इलेक्ट्रोड पर जमा होता जाता है| इस सेल में ऐनोड Zn इलेक्ट्रोड है, क्योंकि इसमें ऑक्सीकरण होता है -
`Zn_((s)) hArr Zn_((aq))^(2+) + 2e^(-)`
इसमें Cu इलेक्ट्रोड कैथोड है, क्योंकि उस पर अपचयन होता है -
`Cu_((aq))^(2+) + 2e^(-) hArr Cu_((s))`
सम्पूर्ण सेल अभिक्रिया निम्न प्रकार से प्रदर्शित की जा सकती है -
`Zn_((s)) + Cu_((aq))^(2+) hArr Cu_((s)) + Zn_((aq))^(2+)`
इस सेल में ऋण ध्रुव ऐनोड तथा धन ध्रुव कैथोड है, क्योंकि पर कैथोड पर दूसरे ध्रुव से इलेक्ट्रॉन आते हैं | अतः डेनियल सेल को निम्न प्रकार प्रदर्शित कर सकते हैं -
`Zn_((s))|ZnSO_(4(aq))||CuSO_(4(aq))^(-)|Cu_((s))`.