चित्र में एक लोलक प्रदर्शित है। माना लोलक की प्रभावकारी लंबाई l है तथा लोलक का द्रव्यमान m है।
जब लोलक अधिकतम विस्थापित स्थिति B पर है तो उस पर लगने वाले बल है-
(i) लोलक का भार mg ऊध्वार्धर निचे की ओर तथा
(ii) डोरी में तनाव T डोरी के अनुदिश निलंबन बिंदु O की ओर ।
भार `mg` को दो घटकों में वियोजित करने पर घटक `mg cos theta` डोरी के अनुदिश (तनाव `T` के विपरीत) और घटक `mg sin theta` डोरी के लंबवत (मध्यमान स्थिति की ओर) होगा। घटक `mg sin theta` ही लोलक को इसकी माध्य स्थिति A पर लाने की चेष्टा करता है, इसे प्रत्यानयन बल कहते है ।
अतः प्रत्यानयन बल `=mg sin theta` (माध्य स्थिति A की ओर)
यदि लोलक का आयाम कम है अथार्त कोण `theta` छोटा है तो
`"sin" theta ~~(x)/(l)`
अतः प्रत्यानयन `= mg theta = mg.(x)/(l) " " ...(1)`
यहाँ `x` लोलक का विस्थापन (=AB) और `l` लोलक की प्रभावकारी लंबाई है ।
लेकिन बल= द्रव्यमान `xx` त्वरण
समी (1) से, लोलक का त्वरण `=("प्र्त्यानयन बल")/("लोलक का द्रवमान") =(mg((x)/(l)))/(m)`
`=g*(x)/(l)`
अथार्त त्वरण `=(g)/(l)xx` विस्थापन
`:. ("विस्थापन")/("त्वरण")=(l)/(g) " "...(2)`
चूँकि लोलक त्वरण, उसके विस्थापन `x` के अनुक्रमानुपाती है अतः लोलक की गति सरल आवर्त गति होती है
सरल लोलक का आवर्तकाल `T=2pi sqrt(("विस्थापन")/("त्वरण"))`
`:.` समी (2) से `T=2pi sqrt((l)/(g))`