सरल आवर्त गति में कण की स्थिति ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा का व्यजंक निगमित कीजिये तथा सिद्ध कीजिए की कण की सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है ।
लिखित उत्तर
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गतिज ऊर्जा - सरल आवर्त गति करते हुए कण का वेग `v= omega sqrt(A^(2)-y^(2))` यदि द्रव्यमान m हो तो कण की गतिज ऊर्जा `K.E.=(1)/(2) mv^(2)=(1)/(2) m[ omega sqrt(A^(2)-y^(2))]^(2)` या `K.E=(1)/(2) m omega^(2) (A^(2)-y^(2)) " "...(1)` स्थिति ऊर्जा- सरल आवर्त गति में कण में उत्पन्न त्वरण का मान `alpha=- omega^(2)y`. परन्तु न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से, बल = द्रव्यमान `xx` त्वरण यदि कण का द्रव्यमान m हो तो कण पर लगने वाला प्रत्यानयन बल `F=-m alpha= m omega^(2) y`. चूँकि प्रत्यानयन बल सदैव साम्य स्थिति की ओर दिष्ट होता है अतः कण के विस्थापन को बनाये रखने के लिए प्रत्यानयन बल के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में एक बल कण पर लगगना होगा इस बल का मान साम्य स्थिति पर शून्य है तथा साम्य स्थिति से दूर हटने पर इसका मान बढ़ता जाता है। अतः कण पर लगा मध्यमान बल `F=(0+ m omega^(2)y)/(2)=(1)/(2) m omega^(2) y`. अतः कण को `y` दुरी विस्थापित करने में किया गया कार्य W= बल `xx` विस्थापन या `W=(1)/(2)m omega^(2) y xx y=(1)/(2) m omega^(2) y^(2)` यही कार्य कण में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है, अतः कण की स्थिति ऊर्जा `P.E.=(1)/(2)m omega^(2) y^(2) " "...(2)` सम्पूर्ण ऊर्जा- सरल आवर्त गति करते हुए कण की संपूर्ण ऊर्जा `E=K.E.+P.E=(1)/(2) m omega^(2)(A^(2)- y^(2))+(1)/(2) m omega^(2) y^(2)` या `E=(1)/(2) m omega^(2) A^(2) " "...(3)` समी (3) कण की संपूर्ण ऊर्जा का व्यजंक है चूँकि `m, omega ,A` नियत राशि है अतः `E` भी नियत होगा । इस प्रकार सरल आवर्त गति करते हुए कण की आंतरिक ऊर्जा नियत रहती है ।