गॉस का नियम-इस नियम के अनुसार, किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला संपूर्ण वैद्युत फ्लक्स उस बंद पृष्ठ के अंदर निर्वात में उपस्थित कुल आवेश का `1/epsilon_0` गुना होता है।
जहाँ `epsilon_0` निर्वात की विद्युतशीलता है।
यदि किसी बंद पृष्ठ के अंदर निर्वात में उपस्थित कुल आवेश q हो, तो गाउस प्रमेय से उस बंद पृष्ठ से गुजरने वाला संपूर्ण वैद्युत फ्लक्स
`phi_E=phi_S vecE . vec(dS)=q/epsilon_0`
निगमन (Derivation)-मानलो कोई बिंदु आवेश q किसी गोले के केंद्र O पर रखा है गोले की त्रिन्या r है। तब गोले के पृष्ठ पर स्थित किसी बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र का परिमाण
`E=1/(4piepsilon_0).q/r^2`....(1)
इस क्षेत्र `vecE` की दिशा क्रिन्यीय (Redially) `vec(OP)` के अनुदिश बाहर की ओर होगी।
गोले को कई छोटे क्षेत्रफल अवयवों में विभाजित करते हैं ।
अब यदि बिंदु P को घेरे छोटे क्षेत्रफल अवयव `dvecS` की कल्पना करें तो इसकी दिशा भी `vecOP` के अनुदिश बाहर को ओर होगी। फलस्वरूप `vecE` और `dvecS` के बीच कोण `theta = 0^@` होगा।
अत: क्षेत्रफल अवयव dS से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स
`dphi_E=vecE.dvecS=EdS cos theta `
`d phi_E=EdS cos 0^@=EdS`
समी. (1) से मान रखने पर,
`dphi_E=1/(4piepsilon_0).q/r^2 .dS`....(2)
गोले के पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर `vecE` और `dvecS` के बीच का कोण `0^@` है।
अत: गोले के पृष्ठ से गुजरने वाला संपूर्ण वैद्युत फ्लक्स
`phi_E=phi_Sdphi_E`
समी. (2) से मान रखने पर,
`phi_E=phi_S 1/(piepsilon_0).q/r^2.dS`
`=1/(4piepsilon_0).q/r^2 phi_S dS`
किंतु `phi_S dS=4pir^2` गोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
`therefore phi_E=1/(4piepsilon_0).q/r^2 xx 4 pir^2`
`phi_E=q/epsilon_0`
यही गाउस का नियम ( प्रमेय) है।