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Class 12
PHYSICS
बायो-सेवर्ट नियम द्वारा किसी धारावाही वृ...

बायो-सेवर्ट नियम द्वारा किसी धारावाही वृत्तीय कुण्डली के अक्ष पर स्थित किसी बिन्दू पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता हेतु व्यंजक ज्ञात कीजिए।

लिखित उत्तर

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मानलो a त्रिज्या का एक वृत्तीय लूप है, जिसमें I विद्युत् धारा तौर की दिशा में प्रवाहित हो रही है। लूप के अक्ष पर उसके केन्द्र O से x दूरी पर एक बिन्दु P है, जिस पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। मानलो लूप का तल कागज के तल के लम्बवत् तथा उसका अक्ष OP कागज के तल पर स्थित है। लूप को कई अल्पांशों में विभक्त कीजिए। मानलो लूप के ठीक ऊपरी सिरे पर dl लम्बाई का एक अल्पांश AB है इस अल्पांश से बिन्दु P की दूरी r है। अत: इस अल्पांश AB के कारण बिन्दु P पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता
`dB=mu_0/(4pi).(I.dl.sin theta)/r^2`
जहाँ `theta` अल्पांशAB और अल्पांश को बिन्दु P से मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण है स्पष्ट है कि
`theta=90^@`
`therefore dB=(mu_0)/(4pi).(I.dl.sin 90)/r^2`
`dB=mu_0/(4pi). (I.dl)/r^2` ...(1)
इस क्षेत्र dB की दिशा अल्पांश AB और इस अल्पांश को बिन्दु P से मिलाने वाली रेखा के लम्बवत् तल में PR के अनुदिश होगी।
मानलो `angleCPO=phi`
dB को दो घटकों में वियोजित किया जा सकता है-
(i)`dBsinphi` अक्ष OP के अनुदिश और (ii)`dBcosphi` अक्ष OP के लम्बवत् PN दिशा में।
यदि लूप के ठीक निचले सिरे पर व्यासाभिमुखी उतनी ही लम्बाई dl का एक दूसरा अल्पांश AB' लें, तो इस अल्पांश के कारण भी बिन्दु P पर चुम्बकीयक्षेत्र की तीव्रता `dB=(mu_0)/(4pi).(Idl)/r^2` होगी, किन्तु अब इसकी दिशा PR' के अनुदिश होगी।
dB को पुन: दो घटकों में वियोजित किया जा सकता है-
(i)`dBsinphi` अक्ष OP के अनुदिश और (ii)`dBcosphi` अक्ष OP के लम्बवत् PN' दिशा में।
चूँकि PN और PN' एक-दूसरे के विपरीत हैं, अक्ष OP के लम्बवत् घटक एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। स्पष्ट है कि वृत्तीय लूप के सभी अल्पांशों के कारण जो घटक अक्ष OP के लम्बवत् होंगे, एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे, किन्तु अक्ष OP के अनुदिश सभी घटक आपस में जुड़ जायेंगे ।
अत: वृत्तीय लूप के कारण बिन्दु P पर अक्ष के अनुदिश चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता
`B=SigmadBsinphi`
`B=Sigma(mu_0)/(4pi).(Idl)/r^2 sin phi`
...(2)
परन्तु `sin phi=a/r`
समी. (2) में मान रखने पर,
`B=Sigma(mu_0)/(4pi).(Idl)/r^2 . a/r`
`=(mu_0)/(4pi) .Sigma (Idl.a) / r^3 =(mu_0)/(4pi) . (Ia)/r^3 Sigma dl`
`=mu_0/(4pi). (Ia)/r^3 . 2pia`, [`because Sigmadl=2pia` = लूप की परिधि]
अतः `B=(mu_0)/(4pi).(2piIa^2)/r^3` ...(3)
समकोण `triangleCOP` में ,
`r^2=a^2+x^2`
`therefore r=(a^2+x^2)^(1//2)`
`therefore r^(3) =(a^2+x^2)^(3//2)`
समी. (3) में मान रखने पर,
`B=mu_0/(4pi).(2piIa^2)/((a^2+x^2)^(3//2)) "वेबर/ मीटर"^2`
यदि n फेरों वाली वृत्तीय कुण्डली बनायी जाये, तो
`B=(mu_0)/(4pi).(2pinIa^2)/((a^2+x^2)^(3//2))`
धारावाही कुंडली के केंद्र पर तीव्रता (x= 0 पर) अधिकतम होती है।
`B=(mu_0)/(4pi).(2piIn)/a`
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