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Class 12
PHYSICS
दो समतल वृत्ताकार कुंजड़लियुओं के मध्य अन...

दो समतल वृत्ताकार कुंजड़लियुओं के मध्य अन्योन्य प्रेरकत्व हेतु व्यंजक ज्ञात कीजिये एवं उनके मध्य अन्योन्य प्रेरकत्व को प्रभावित करने वाले कारक को लिखिये |

लिखित उत्तर

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मानलो प्राथमिक कुण्डली P और दिव्तियक कुण्डली S एक - दूसरे के निकट समक्ष राखी हुई है| प्राथमिक कुण्डली P की त्रिज्या `r_1` तथा फेरों की संख्या `n_1` है | इसी प्रकार, दिव्तियक कुण्डली S की त्रिज्या `r_2` तथा फेरों की संख्या `n_2` है |
यदि प्राथमिक कुण्डली में प्रवाहट होने वाली धारा I हो, तो इस कुण्डली के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र
`B = mu_0/(4 pi) * (2pi n_1 I)/r_1 = (mu_0 n_1""I)/(2 r_1)`
इस चुंबकीय क्षेत्र को दिव्तीय कुण्डली S के तल के लिए एकसमान माना जा सकता है | अतः दिव्तियक कुण्डली से बध्द चुम्बकीय फ्लक्स
`phi = nBA`
`=n_2 (mu_0 n_1 ""l)/(2 r_1) * pi r_2^2" ...(1)"`
किन्तु `phi = MI" ...(2)"`
समय. (1) और (2) से,
`M=(mu_0 n_1 n_2)/(2 r_1) * pi r_2^2`
यदि कुंडलियों के मध्य `mu` चुंबकशीलता का कोई माध्यम हो, तो
`M = mu(n_1 n_2 )/(2 r_1) xx pi r_2^2`
यदि दो समतल वृताकार कुंडलियों के बिच अन्योन्य प्रेरकत्व के लिए व्यंजक है |
आयोज्य प्रेरकत्व की निर्भरता---
(i) प्राथमिक कुण्डली में फेरों की संख्या `n_1` का मन बढ़ाने पर अन्योन्य प्रेरकत्व का मान बढ़ जाता है |
(ii) दिव्तियक कुण्डली में फेरों की संख्या `n_2` का मान बढ़ाने पर अन्योन्य प[रेरकत्व का मान बढ़ जाता है |
(iii) प्रथिमिक कुण्डली की त्रिज्या `r_1` का मान बढ़ाने पर अन्योन्य प्रेरकत्व का मान कम हो जाता है |
(iv) दिव्तियक कुण्डली का क्षेत्रफल `(pi r_2^2)` का मान बढ़ाने पर अन्योन्य फरेरकत्व का मान बढ़ जाता है |
(v) दोनों कुंडलियों के बिच अधिक चुंबकशीलता का माध्यम रखने पर अन्योन्य प्रेरकत्व का मान बढ़ जाता है
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