प्रतिवर्ती क्रियाविधि (Process of Reflex Action)- प्रतिवर्त क्रिया में मेरुरज्जु ( Spinal cord) भाग लेती है जबकि मस्तिष्क का इसमें कोई कार्य नहीं होता। मनुष्य की इच्छा के बिना ये क्रियाएँ बाहरी उद्दीपनों के फलस्वरूप होती हैं। जैसे कि जब हम किसी गर्म वस्तु को छूते हैं तो यकायक अपना हाथ हटा लेते हैं। इस प्रकार संवेदनाओं को संवेदी अंगों (Sensory orans) से संवेदी तनत्रिकाओं (Sensory neuron) के माध्यम से मेरुरज्जु तक पहुँचा दिया जाता है। यह संवेदना या प्रेरणा सुषुम्ना में पाये जाने वाले संवेदी तन्तुओं में से होकर पृष्ठीय मूल के द्वारा सुषुम्ना तक पहुँचती हैं तथा सायटॉन के एक्सॉन सुषुम्ना के धूसर द्रव्य में इन्हें ले जाते हैं। धूसर द्रव्य में से प्रेरणा या संवेदना चालक तन्त्रिका में पहुँचती है। चालक तन्त्रिका सुषुम्ना तन्त्रिका के आधारीय मूल से निकलकर पेशियों में जाकर विभाजित हो जाती हैं पेशी प्रेरणा या उद्दीपन के अनुसार कार्य करती है। अत: हाथ उठ जाता है।
