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BIOLOGY
अवशेषी अंग क्या हैं ? ये जैव विकास को कि...

अवशेषी अंग क्या हैं ? ये जैव विकास को किस प्रकार स्पष्ट करते हैं ?

लिखित उत्तर

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अवशेषी अंग-जीवों के शरीर में कछ ऐसे अंग पाये जाते हैं, जिनकी शरीर में कोई आवश्यकता नहीं होती | इन अंगो की अवशेषी अंग (Vestigeal organ) कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि पूर्व में ये सक्रिय रहे होंगे, लेकिन वातावरण अनुकूलनों के कारण कालान्तर में निष्क्रिय हो गये। मनुष्य की अपेण्डिक्स, पूछ कशेरुकाएं, आंख को कन्जक्टाइवा इसके उदाहरण हैं। इन अंगों की उपस्थिति यह दर्शाती हैं, कि जावा म क्रमिक परिवर्तन हुआ है।
कुछ अवशेषी अंग निम्न हैं.
(1) नेत्रों की प्लीका सेमीलुनेरिस-मानव के आँख के अन्दरुनी कोण पर पायी जाने वाली झिल्ली है जो कुत्ता, बिल्ली एवं खरगोश में पाई जाने वाली निमेषक पटल का अवशेष होती है।
(2) कर्ण पल्लव पेशियाँ-मनुष्य को कर्ण पल्लव को हिलाने की आवश्यकता नहीं होने से ये अवशेषी हो गई हैं।
(3) अक्लदाढ़-मनुष्य में ये मोलर दाँतों के तीसरे जोड़े का अवशेषी हो गए है।
(4) पुच्छ कशेरुकाएँ-मनुष्य में पूँछ नहीं पायी जाती, लेकिन कशेरुक दण्ड में 4 पुच्छ कशेरुकाएँ पायी जाती हैं। अत: मानव में पहले कभी पूँछ रही होगी।
(5) कृमिरूप परिशेषिका-घास-फूंस खाने वाले स्तनियों में सेल्यूलोज के पाचन के लिये सीकम पाई जाती है। अब मनुष्य में सेल्यूलोज का पाचन नहीं होता। अत: ये कृमिरूप परिशेपिका के रूप में अवशेषी हो गयी हैं।
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