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Class 10
PHYSICS
ओम के नियम की व्याख्या निम्न शीर्षकों के...

ओम के नियम की व्याख्या निम्न शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए-
(i) सिद्धांत, (ii) उपकरण का नामांकित रेखाचित्र, (iii) प्रमुख सावधानियाँ।

लिखित उत्तर

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ओम के नियम का सत्यापन-
(i)नियम-ओम का नियम-सन् 1827 में जॉर्ज साइमन औम ने अपने प्रयोग द्वारा पता लगाया, कि किसी चालक के सिरों पर लगाये गये विभवान्तर और उसमें बहने वाली धारा के मध्य एक निश्चित संबंध होता है, जिसे उन्होंने एक नियम के रूप में प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार,
"किसी चालक की भौतिक अवस्था (जैसे-लंबाई, ताप आदि) में परिवर्तन न हो तो उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत् धारा उसके सिरों पर लगाये गये विभवान्तर के अनुक्रमानुपाती होता है "
यदि किसी चालक के सिरों पर लगाया गया विभवान्तर V और बहने वाली धारा I हो, नियमानुसार,
`V prop I`
या V=RI .....(1)
जहाँ R एक नियतांक है, जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं। समीकरण (1) को निम्न प्रकार से भी लिख सकते हैं-
`R=V/I` या प्रतिरोध =`"विभवान्तर"/"धारा"`
यदि विभवान्तर 1 वोल्ट, धारा 1 ऐम्पियर में हो, तो प्रतिरोध 1 ओम के बराबर होता है।
1 ओम= `"1 वोल्ट"/"1 ऐम्पियर"`
अत: यदि किसी चालक के सिरों के मध्य 1 वोल्ट का विभवान्तर लगाने पर उसमें बहने वाली विद्युत्धारा 1 ऐम्पियर हो, तो उस चालक का प्रतिरोध 1 ओम होता है।
(ii)विद्युत् परिपथ का रेखाचित्र-

जहाँ, B = बैटरी, K = एकमार्गी कुंजी, Rh = धारा नियंत्रक, A = अमीटर, = बोल्टमीटर, R= प्रतिरोधी चालक।
(i) प्रेक्षण तालिका-
(a) अमीटर का अल्पतमांक = ___
(b) वोल्टमीटर का अल्पतमांक =______

(iv) सावधानियाँ-(1) ऐम्पियरमापी को परिपथ में श्रेणी क्रम में संयोजित करना चाहिए।
(2) वोल्टमीटर को परिपथ में समान्तर क्रम में संयोजित करना चाहिए।
(3) चालक में उच्चधारा प्रवाहित नहीं करना चाहिए।
(4) सभी तारों को संयोजक स्थलों पर पूरी तरह कस देना चाहिए।
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