(i) प्रयुक्त पदार्थ - 1. सिलिका
2. क्षार धातु `(CaCO_(3))`
3 व्दिसंयोजक धातु (Ca , Pb , PbO)
4. विरंजक `(MnO_(2), NaNO_(3), KNO_(3))`
5. क्लेट (काँच का टुकड़ा )
रंग `(MnO_(2) , CU_(2)O).`
बेच - काँच निर्माण हेतु प्रयुक्त पदार्थ बारीक पीस क्लेट मिला देते हैं । यही बेच हैं ।
2. पात्र भट्टी - बेचे को पात्र भट्टी या हौज भट्टी में लेकर `1400^(@)` तक वायु अंगार गैस व्दारा गर्म करते हैं । मिश्रण शीघ्रता से गल जाता हैं व पारदर्शी काँच प्राप्त होता हैं । 3. रासायनिक अभिक्रिया - भट्ठी में होने वाली रासायनिक अभिक्रिया निम्न हैं - `CaCO_(3) + SiO_(2) + to underset("कैल्सियम सिलिकेट")(CaSiO_(3) + CO_(2) uarr)`
`underset ("सिलिका")(Na_(2)CO_(3) + SiO_(2)) to underset("सोडियम सिलिकेट")(Na_(2)SiO_(3) +) CO_(2)uarr`
`Na_(2)SiO_(3) + CaSiO_(3) + 4SiO_(2) to underset ("काँच")(Na_(2)O*CaO*6SiO)`
4. काँच से वस्तु निर्माण - पिघले काँच को साँचे में डालकर , फूँकनी व्दारा फूँककर इच्छित आकार प्राप्त किया जाता हैं ।
5. तापानुशील - काँच की बनी वस्तुएँ तापक्रम परिवर्तन से टूट जाती हैं , अतः इसकी सहनशक्ति बढ़ाने के लिए इन्हें ऐसे गर्म कक्ष में ले जाते हैं , जिनका तापक्रम धीरे - धीरे कम हो रहा हो । इस क्रिया को तापानुशीतन कहते हैं ।
6. रंग देना - पिघले काँच में इच्छित रंग डाल देते हैं । उदाहरण - CaO - नीला रंग , `Cr_(2)O_(3)` - हरा रंग , MgO - बैंगनी रंग ।