चित्र के अनुसार माना की XY एक प्रवर्तक प्रष्ट है जिस पर कोई समतल तरंगाग्र AB आपतन कोण i से आपतित हो रहा है
यदि t=0 पर तरंगाग्र AB प्रवर्तक प्रष्ट XY को बिंदु A पर स्पर्श करता है बिंदु A से प्रष्ट XY पर अभिलम्ब AN खींचता तो `anglePAN=i=` आपतन कोण होगा जहाँ `BB_(1)=AA_(1)`=ct |परन्तु प्रवर्तक प्रष्ट की उपस्थित में ज्योही तरंगाग्र प्रष्ट के बिंदु A को स्पर्श करता है बिंदु A से द्वितीयक तरंगिका उत्पन्न होती है जो t समय में AS=ct दुरी तय करेगी
बिंदु A को केंद्र मानकर ct त्रिजिया का एक गोला खींचा तथा बिंदु `B_(1)` से इस गोले पर स्पर्श रेखा `B_(1)S` खींचा अतः `B_(1)S` प्रवर्तित तर्जागर होगा
प्रवर्तित के नियमो की व्याख्या - चित्र में AT प्रवर्तित तरंगाग्र `B_(1)T` के लंबवत है अतः AT प्रवर्तित किरण होगी अतः `angleTAN=r=` प्रवर्तन कोण होगा अथार्त
`i=anglePAN=90^(@)-angleBAN=angleBAB`
`r=angleSAN=90^(@)-angleSAB_(1)=angleAB_(1)S`
अब `angleASB_(1)` तथा `triangleABB_(1)` में
AB=`B_(1)S`
`BB_(1)=AS`
तथा
`angleABB_(1)=angleASB_(1)=90^(@)`
`therefore` दोनों त्रिभुज समान है अतः
`angleBAB_(1)=angleAB_(1)S`
या
अथार्त आपतन कोण प्रवर्तन कोण के बराबर होता है तथा चित्र से यह स्पष्ट है की आपतित किरण प्रवर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक ही तल में होते है यही प्रवर्तन का नियम है