संधारित्र को बैटरी से वियोजित का समान धारिता के दूसरे संधारित्र से संयोजित करने पर, आवेश का दोनों संधारित्रों पर समान विभव होने तक पुनः वितरण होता है। माना समान विभव `V_1` है तथा चूँकि दोनों की धारिता समान है अतः आवेश के पुनः वितरण के पश्चात इन पर आवेश की मात्रा सम्मान होगी जो की `Q_1` के बराबर है।
तब आवेश संरंक्षण नियम से
` Q_1 + Q_1 = Q`
`rArr " "2Q_1 = Q`
`rArr" "Q_1 = 1/2 Q`
तथा समान विभव `V_1 = 1/2 V`
अतः संधारित्रों में संचित्र ऊर्जा
`U_2 = 2xx1/2 Q_1 V_1 = Q_1 V_1`
`U_2 = 1/2 Q xx1/2 V = 1/4 QV`
या `U_2 = 1/4 xx9xx10^(-9) xx100`
`=2.25 xx10^(-6)` जूल
अतः `U_2 = 1/2 U_1`
यह ऊर्जा प्रारंभिक ऊर्जा की आधी है। अर्थात इस प्रक्रिया में ऊर्जा की हानि होती है जो की उष्मा एवं विधुत - चुम्बकीय विकिरणों के रूप में उत्पन्न होती है।