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BIOLOGY
द्विसंकर संकरण (Dihybrid eross) को परिभा...

द्विसंकर संकरण (Dihybrid eross) को परिभाषित कीजिये। मेण्डल के द्विसंकर संकरण प्रयोग को चैकर बोर्ड द्वारा समझाइये।

लिखित उत्तर

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जब संकरण दो जोड़ी कारकों अधवा युग्मविकल्पियों के मध्य करवाया जाता है तो इसे द्विसकर संकरण कहते हैं।
मेण्डल ने दो जोड़ी विपर्यासी लक्षणों जैसे गोल व पीले समयुग्मजी वीजों (Round & Yellow, RRYY) वाले पौधों का हरे तथा झुर्रीदार समयुग्मजी (Wrinkled & Green, rryy) बीजों वाले मटर के पौधों से सकरण करवाया।

इनमें संकरण करवाने पर `F_` पीढ़ी (प्रथम संतानीय पीढ़ी) में सभी * पौधे गोल व पीले बीजों (RrYy) वाले उत्पन्न हुए मटर के पौथे में बीज की गोल आकृति झुर्रींदार पर तथा पीला रंग हरे रंग के बीज पर प्रभावी है।
`F_` पीढ़ी के पौधों से उत्पन्न बीजों को वापस उगाने पर उनमें स्वनिषेचन/स्वपरागण द्वारा `F_2` पीढ़ी (द्वितीय संतानीय पीढ़ी) में चार प्रकार के पौधे प्राप्त होते हैं जिनका समलक्षणी/लक्षणप्ररूप अनुपात 9 : 3 : 3 : 1 प्राप्त हुआ।
9/16 में दोनों प्रभावी लक्षण अर्थात् -गोल व पीले बीज
3/16 में एक प्रभावी तथा एक अप्रभावी-गोल व हरे बीज
3/16 में एक अप्रभावी तथा एक प्रभावी- झुर्रीदार व पीले बीज
1/16 में दोनों अप्रभावी-झुर्रीदार व हरे बीज `F_2` पीढ़ी का समजीनी/जीन प्ररूप अनुपात- 1 : 2 : 2 : 4 : 1 : 2 : 1 : 2 : 1 आता है।
इस प्रयोग के आधार पर मेंडल ने स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) का प्रतिपादन किया।
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