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BIOLOGY
औद्योगिक मीलनता को स्यष्ट कीजिए...

औद्योगिक मीलनता को स्यष्ट कीजिए

लिखित उत्तर

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औद्योगिक मीलनता (Industrial Meanism) औद्यागिक मीलतत प्राकृतिक चयन का एक सशक्त प्रमाण है। इंग्लैण्ड में औद्योगिक क्रान्ति से पहले लाइकंन ं ढके वृक्षों के तनों पर बिस्टन बेटुलेरिया (Biston betularia) नामक सलेटी रग का शल पाया जाता था। इसका एक उत्परिवर्ती रूप काले रंग का शलभ (Moth) था जो बहुत कन संख्या में मिलता था। इसे कार्बनिरिया (Carbonaria) नाम दिया गया। चूंकि बृक्ष सलेटी स के लाइकेनों से ढके थे अत: सलेटी शलभ समान पृष्ठ भूमि (Camoufiage) के कारण अपन परभक्षियों से बचे रहते थे, लेकिन कार्बोनेरिया उत्परिवर्ती काले होने के कारण सलेटी पृष्टमूनि पर परभक्षियों को आसानी से दिख जाते थे और उनका शिकार बन जाते थे। इसका अर्थ हुआ कि सलेटी रंग के शलभों की समष्टि में इक्का-दुक्का कार्बोनेरिया शलभ पाए जाते थे।
औद्योगिक क्रान्ति के बाद (दो सौ वर्षों की अवधि में) कार्बोनेरिया शलभों की समाष्ट 90 प्रतिशत तक बढ़ गई
ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ औद्योगीकरण नहीं हुआ था, कार्बोनेरिया शलभों की आवादी क व सलेटी शलभों की अधिक ही रही। इसकी व्याख्या प्राकृतिक वरण के सिद्धान्त । एक मिली-जुली समष्टि में वेहतर अनुकूलन वाले जीवों की उत्तरजीविता (Survisa) अधिक होती है
औद्योगिक क्रान्ति में कोयले का अत्यधिक प्रयोग हआ। वक्षों के दने प्रदूषण से क हो गए। ऐसी स्थिति में काले शलभ (कार्बोनिरिया) लाभ की स्थिति में आ गए जबकि शलभ परभक्षियों का शिकार बनने लगे। अत: उनकी समष्टि छोटी हुई।
प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों, कोयले के स्थान पर विद्यत के प्रयोग से वृक्षों के कन बार फिर लाइकेन उगने के कारण सलेटी हो गए। इससे सलेटी शलभों की बढ़ने लगी व कार्बानेरिया शलभ कम हो गए। लाइकेन प्रदूषण के सूचक कार्य करते हैं। इस घटना को ही औद्योगिक मीलनता कहा
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