सूक्ष्मजीवों का प्रयोग, रासायनिक उर्वरकों तथा पीडकनाशियों के प्रयोग को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार सम्पन्न होगा ? व्याख्या कीजिए।
लिखित उत्तर
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रासायनिक उर्वरक के स्थान पर जैव उर्वरक तथा रासायनिक पीड़नाशियों के स्थान पर जैव नियंत्रकों का प्रयोग किया जा सकता है। जैव उर्वरक तथा जैव नियंत्रक जैविक पोती का अभिन्न हिस्सा है तथा पारिस्थितिक मित्र (Ecofriendly) समाधान हैं। (A) सक्ष्मजीवों का जैव उर्वरक (Biofertilizer) के रूप में प्रयोग - (i) लेग्यूमिनस पौधों की जड़ में पाया जाने वाला सहजीवी जीवाणु राइजोबियम (Rhirobium) वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है (इसके बीजाणुओं को मृदा में जैव उर्वरक के रूप में डाला जाता है।)। (ii) एजोस्पाइरिलम ( azospirillium) जीवाणु कुछ पौधों की जड़ों से विरल या ढीले रूप से सम्बद्ध रहकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं। (iii) एजोटोबैक्टर (Azotobacter) एक मुक्तजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु हैं। (iv) सायनोबैक्टीरिया, जैसे नोस्टॉक, एनाबीना स्वपोषी जीव हैं जो नमी की उपस्थिति में वृद्धि कर वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। धान के खेत में यह नाइट्रोजन की मात्रा में तो वृद्धि करते ही हैं साथ ही कार्बनिक पदार्थ को मात्रा में वृद्धि कर मृदा के संघटन को बेहतर बनाते हैं। (v) ग्लोमस (Glomus) वंश की अनेक कवक माइकोराइजा बनाती हैं। (B) सूक्ष्मजीवों का जैव नियंत्रक कारक (Bio control agent) के रूप में प्रयोग - (i) जीवाणु बेसीलस थुरिंजिएंसिस (Bacillus thuringiensis) के बीजाणुओं का जैव नियंत्रक के रूप में प्रयोग किया जाता है। बाजार में उपलब्ध इनके 'स्पोर' अनेक प्रकार के कीट लार्वाओं के नियंत्रण में प्रयोग किए जाते हैं। इस जीवाणु की जीवाणु विष को कोड करने वाली Cry जीन को जैनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से अनेक प्रकार के फसली पौधों में स्थानान्तरित कर पीड़क प्रतिरोधी Bt फसलें भी बनायी गयी हैं। (ii) कवक ट्राइकोडर्मा का प्रयोग अनेक पादप रोगजनकों के नियंत्रण में किया जाता है। (iii) न्यूक्लियोपॉलीहेड़ोवाइरस वंश के बैक्यूलोवाइरस अनेक कीटों व अन्य आर्थोपोडस के प्रजाति विशिष्ट जैव नियंत्रण में प्रयोग किए जाते हैं। यह अन्य किसी (अलक्ष्य जीव) को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाते।