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Class 12
BIOLOGY
पारितंत्र सेवा के अन्तर्गत बाढ़ व भू-अपर...

पारितंत्र सेवा के अन्तर्गत बाढ़ व भू-अपरदन नियंत्रण आते हैं। यह किस प्रकार पारितंत्र के जैविक घटकों द्वारा पूर्ण होते हैं ?

लिखित उत्तर

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पारितंत्र के जैविक घटक विशेषतः वृक्ष/वनस्पति भूअपरदन नियंत्रण तथा बाढ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) वृक्षों तथा किसी भी प्रकार के पेड़-पौधों की जड़ें मृदा कणों को आपस में बांधे रखती हैं, अतः वायु व जल के कारण मृदा कणों का विस्थापन नहीं होता (मृदा अपरदन रुक जाता है।)
(ii) वनाच्छदित भू-भाग पर वर्षा होने पर जल की अधिक गतिज ऊर्जा वाली बँदें पहले वृक्ष की कैनोपी पर टकराती हैं। फलस्वरूप उनकी ऊर्जा कम हो जाती है। पानी की यह बँदें अब जमीन पर कम वेग से या धीरे-धीरे गिरती हैं। इससे मृदाकणों का विस्थापन नहीं होता, साथ ही जल भूमि में प्रवेश कर भूजल को रिचार्ज करता है। अत: मृदा अपरदन तो रुकता ही है साथ ही जल तेजी से नहीं बह पाता अतः बाढ़ का खतरा समाप्त हो जाता है। वनविहीन क्षेत्र में वर्षा की बँदें मृदा अपरदन व बाढ दोनों का कारण बनती हैं। वृक्षों के अभाव के कारण वह मदा से तेजी से टकराती हैं जिससे मृदा कण विस्थापित हो जाते हैं। कम वर्षा होने पर यह विस्थापित कण वायु द्वारा अथवा अधिक वर्षा होने पर जल द्वारा आसानी से दूसरे स्थान पर पहुँच जाते हैं। यही मृदा अपरदन है। वृक्ष विहीन भूमि अधिक वर्षा होने पर बाढ़ का कारण बनती है।
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